जैन महाकुंभ: जानिये कौन थे भगवान बाहुबली
जैन महाकुम्भ 17 फरवरी 2018 से शुरू हो गया. हर 12 साल बाद होने वाला भगवान बाहुबली का महामस्तकाभिषेक 20 दिन तक चलेगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान बाहुबली हैं कौन?
ऋषभदेव जैन धर्म के पहले तीर्थंकर थे. जैन सिद्धान्त के अनुसार ‘तीर्थंकर’ नाम की एक पुण्य कर्म प्रकृति है. तीर्थंकर वह व्यक्ति हैं जिन्होनें पूरी तरह से क्रोध, अभिमान, छल, इच्छा, आदि पर विजय प्राप्त की हो.
ऋषभदेव के दो पुत्र हुए जिनका नाम भरत और बाहुबली था. भगवान बाहुबली को विष्णु का अवतार माना जाता था. वे अयोध्या के राजा थे और उनकी दो रानियां थीं.
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एक रानी से 99 पुत्र और एक पुत्री तथा दूसरी से गोम्मटेश्वर भगवान बाहुबली तथा एक पुत्री सुंदरी थी. बाहुबली का अपने ही भाई भरत से उनके शासन, सत्ता के लोभ तथा चक्रवर्ती बनने की इच्छा के कारण दृष्टि युद्ध, जल युद्ध और मल्ल युद्ध हुआ था.
इसमें बाहुबली विजयी रहे, लेकिन उनका मन ग्लानि से भर गया और उन्होंने सब कुछ त्यागकर तप करने का निर्णय लिया.
अत्यंत कठिन तपस्या के बाद वे मोक्षगामी बने. जैन धर्म में भगवान बाहुबली को पहला मोक्षगामी माना जाता है. भगवान बाहुबली ने इंसान के आध्यात्मिक उत्थान और मानसिक शांति के लिए चार बातें बताई थीं: अहिंसा से सुख, त्याग से शांति, मैत्री से प्रगति और ध्यान से सिद्धि मिलती है.
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