अन्तर्राष्ट्रीय परिवार दिवस : विश्व में शान्तिमय वातावरण की कामना
- भारत साधु समाज के हाल ही में चुने गये नवीन कार्यकारी अध्यक्ष श्री मुक्तानन्द ब्रह्मचारी जी महाराज, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, द्वारिका सनातन विद्यापीठ के स्वामी केशवानन्द जी महाराज और अन्य पूज्य संतों ने मिलकर विश्व एक परिवार बने तथा पूरे विश्व में शान्तिमय वातावरण हो इसकी कामना की
- परिवार को बनायें रखने के लिये गम खाये और नम जाये
- जब व्यक्ति परिवार को एकत्रित रखना चाहता है तो निश्चितरूपेन कैंची की तरह नहीं बल्कि सूई को अपने जीवन का लक्ष्य बनायें-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 15 मई। परमार्थ निकेतन में अन्तर्राष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया गया। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने परिवार की महिमा बताते हुये कहा कि परिवार साथ हो तो व्यक्ति जीवन में हर समस्याओं का सामना कर सकता है। जीवन में आयी समस्याओं के भवसागर में लाइफ जैकेट का काम करता है परिवार। उन्होने कहा कि एक संस्कार युक्त खुशहाल परिवार धरती पर स्वर्ग हैे। भारत की परम्परा भी संयुक्त परिवार की रही है और हमारा तो धर्म भी वसुधैव कुटुम्बकम् की शिक्षा देता है।
प्रतिवर्ष 15 मई को अन्तर्राष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाता है जिसका उद्देश्य परिवारों के संबंधित मुद्दांे के विषय में लोगों को जागरूक करना, परिवार श्रंखला को प्रभावित करने वाले सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय प्रक्रियाओं के विषय में चिंतन करना तथा परिवारों के हितों और महत्व को बढ़ाने हेतु अवसर प्रदान कराना।
अन्तर्राष्ट्रीय परिवार दिवस के अवसर पर भारत साधु समाज के हाल ही में चुने गये नवीन कार्यकारी अध्यक्ष श्री मुक्तानन्द ब्रह्मचारी जी महाराज, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, द्वारिका सनातन विद्यापीठ के स्वामी केशवानन्द जी महाराज और अन्य पूज्य संतों ने मिलकर विश्व एक परिवार बने तथा पूरे विश्व में शान्तिमय वातावरण हो इसकी कामना की।
सभी पूज्य संतों ने जल, जंगल और जमीन को प्रदूषण मुक्त रखने का संकल्प कराया। आज अन्तर्राष्ट्रीय परिवार दिवस के अवसर पर साधु समाज की ओर से जल और थल के लिये सेवा का संकल्प लिया गया। संतों ने कहा कि लोगों के जीवन में जो जंगली भाव आ गया है; जंगलीपन आ गया है उससे सभी को मुक्ति मिले इस हेतु संकल्प कराया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि भारत की तोे जड़ों में ही परिवार का बीज समाहित है। विश्व एक परिवार का भाव अगर सभी के हृदय में पैदा होता है तो देशों के मध्य सीमाएं तो होगी साथ ही समीपता भी होगी। देशोेेें के मध्य बार्डर तो होंगे परन्तु दिलों में दिलों में बार्डर नहीं होगे; भवनों में दीवारें होगी लेकिन भावनाओें में दीवारें नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि आज भवन तो बड़े-बड़े बन गये है लेकिन भावनाओ से खाली होते जा रहे है। आज हमारे परिवारों की हालत सिकुड़ती जा रही है। पहले हमें परिवारों को खुशहाल बनाना है तभी हम विश्व एक परिवार बना सकते है। स्वामी जी महाराज ने कहा कि भगवान शंकर जी का परिवार हमें शिक्षा देता है कि एक ही परिवार में कितने विरोधी स्वभाव वाले है लेकिन फिर भी वह एक उत्कृट परिवार का उदाहरण है। देवताओं और असुरों के मध्य जब सागर मंथन हुआ तब सब अमृत की दौड़ में थे, सब चाहते है सुख मिले लेकिन जब जहर आया तो उसे कोई लेने के लिये तैयार नहीं था तब फिर महादेव ही सामने आये और उन्होने जहर को अपने कंठ में धारण कर लिया इसलिये वे महादेव है। वैसे ही आज जीवन में दुःख रूपी जहर है।
’’जिन्दगी में जिनको गम का जहर पीना आ गया, है हकीकत जिन्दगी में उनको जीना आ गया।’’
स्वामी जी महाराज ने कहा कि परिवार को बनायें रखने के लिये गम खाये और नम जाये। जब व्यक्ति परिवार को एकत्रित रखना चाहता है तो निश्चितरूपेन कैंची की तरह नहीं बल्कि सूई को अपने जीवन का लक्ष्य बनायें, छोटी सी होने के बावजूद भी सूई जोड़ती है और बड़ी होने के बावजूद भी कैंची काट देती है। एक कैंची में सैकड़ों, हजारों सूईयां बन सकती है परन्तु जब वह कैंची बन जाती है तो इतनी सामथ्र्य होते हुये भी वह काटने का काम करती है इसलिये समाज में हम सभी को जोड़ने का काम करना है। विश्व में तभी शान्ति आ सकती है जब हम एक होकर रहे; नेक होकर रहे। एक बने और नेक बने यही तो विश्व दर्शन है। जब एक होकर रहंेंगे तो न कोई दीवार होगी न झगड़ा होगा। शिव जी के परिवार में परस्पर विरोधी यथा नंदी और शेर, सांप और चूहा दोनों का ही विरोधी स्वभाव होने के बावजूद वे एक साथ प्रेम से रहते है क्यों, क्योंकि परिवार का मुखिया त्यागी है; तपस्वी है और सहनशील है नीलकंठ बनने को भी तैयार है। दोष किसी का, जहर किसी का लेकिन खुद जहर पीने को तैयार है और उस जहर को न तो उगला न निगला इसलिये वे नीलकंठ कहलाये। उन्होने भीतर की सृष्टि की रक्षा की और बाहर की सृष्टि की भी रक्षा की। भीतर भी घुटन नहीं और बाहर भी किसी को पीड़ा नहीं पहुंचायी और सब की रक्षा की और यही जीवन का अमृत है। स्वामी जी ने कहा कि अमृत पान कर लेना केवल अमृत नहीं है बल्कि ऐसी घड़ियों में सब को साथ लेकर चलना अर्थात कटुताओं को सहन कर आगे बढ़ते जाने का नुस्खा है वहीं अपने परिवार को और स्वयं के लिये, समाज के लिये और पूरे विश्व के लिये वरदान साबित हो सकता है अन्यथा जीवन अभिशाप बनता चला जाता है। लोगों के पास सब कुछ है लेकिन भीतर से खाली होते चले जा रहे है; शान्ति जो सबसे ज्यादा कीमती चीज है वह खोती चली जा रही है अःत आईये विश्व परिवार दिवस पर हम आपने आप को आगे बढ़ाये और आज यही संकल्प लें।
सभी पूज्य संतों ने विश्व स्तर पर जल की आपूर्ति हेतु वाॅटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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