Post Image

होली 2020: जानिए क्यों इन जगहों पर होली खेलना है वर्जित

रंगों का त्यौहार होली उल्लास और हर्ष लेकर आता है. लेकिन आज भी कुछ स्थान ऐसे हैं जहाँ होली खेलना वर्जित है या किसी कारणवश नहीं खेल पाते. तो चलिए आज हम आपको कुछ ऐसी जगह लेकर चलते हैं जहाँ लोग होली नहीं खेलते-

यहाँ पुरुषों, बच्चों को होली खेलना है मना 

होली खेलना वर्जितउत्तर प्रदेश के कुंडरा गांव में होली के त्योहार पर केवल महिलाओं रंगों और गुलालों से होली खेलने की इजाजत है। इस दिन पुरुष खेतों पर चले जाते हैं ताकि महिलाएं आराम से होली का आनंद लें। इस दिनराम जानकी मंदिर में एकत्र होकर जमकर होली खेलती हैं लेकिन लड़कियों, पुरुषों और बच्चों तक को होली खेलने की इजाजत नहीं होती है। दरअसल इसके पीछे एक कहानी यह है कि कि यहां होली के दिन मेमार सिंह नाम के एक डकैत ने एक ग्रामीण की हत्या कर दी थी। उस समय से लोगों ने होली खेलना बंद कर दिया था। बाद में महिलाओं को होली खेलने की इजाजत मिल गई।

125 साल से होली मनाने पर प्रतिबंध

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की मुलताई तहसील के डहुआ गांव में 125 साल से होली मनाने पर प्रतिबंध है। यहां के लोगों की माने तो, कि लगभग 125 साल पहले इस गांव में होली के त्योहार वाले दिन गांव केप्रधान की बावड़ी में डूबने के कारण मौत हो गई थी।प्रधान की मौत से गांव वाले बहुत दुखी हुए और उनमें भय समा गया .अब यहां होली ना खेलना धार्मिक मान्यता बन चुकी है।

[earth_inspire]

महामारी के डर से नहीं मनाते होली

झारखंड के बोकारो के कसमार ब्लॉक स्थित दुर्गापुर गांव में 100 साल से होली नहीं खेली गई। कहते हैं की यहाँ के राजा के बेटे की होली के दिन मौत हो गयी थी और उसके बाद जब भी कोई होली खेलता तो गाँव में महामारी फ़ैल जाती थी. तभी से लोगों ने महामारी और किसी आपदा के भय से होली खेलना बंद कर दिया.

यह भी पढ़ें-होली विशेष: इन देशों में भी होता है होलिका दहन

श्राप के डर से नहीं मनाते होली 

होली खेलना वर्जितहरियाणा के कैथल के गुहल्ला चीका स्थित गांव में 150साल से होली का पर्व नहीं मनाया गया है। कहते हैं सवा सौ साल पूर्व यहाँ एक ठिगने  बाबा रहते थे जिनका लोग अक्सर मज़ाक उड़ाते थे. इसी से नाराज़ होकर उन्होंने होलिका में कूद कर आत्महत्या कर ली और आत्महत्या से पूर्व इस गाँव को श्राप दिया की जो भी यहाँ होली मनायेगा उसका परिवार नष्ट हो जायेगा. हालाँकि गांववालों के माफ़ी नागने के बाद उन्होंने श्राप को कम करते हुये कहा की होली पर जब किसी के घर बेटे का जन्म होगा और उसी दिन कोई गाय बछड़े को जन्म देगी तब यह गाँव श्रप्मुक्त हो जायेगा. हालाँकि अभी तक ऐसा संयोग नहीं बना इस गांव में तो इस शाप का भय इस तरह फैला हैकि यहां के लोग एक-दूसरे को होली के दिन शुभकामनाएं तक नहीं देते.

यहां देवी ने होली खेलने को किया मना 

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से 35 किमी दूरी पर खरहरी नाम के एक गांव में लगभग 200 साल से होली का त्योहार नहीं मनाया जाता है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं 150 साल पहले यहां भीषण आग लगी थी, जिसकेजिसके कारण गांव के हालात बेकाबू हो गए थे।आग लगने के बाद पूरे गांव में महामारी फैल गई। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि इस त्रासदी से छुटकारा पाने के लिए एक हकीम को देवी ने स्वप्न में दर्शन दिए और होली खेलने को मना किया. तभी से इस गाँव में होली का त्यौहार नहीं मनाया जाता.

[earth_inspire]

 

Post By Shweta