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चुनाव 2019 : क्या कहता है ज्योतिष ? कौन जीतेगा, राजनेताओं का भविष्य ?

चुनाव 2019 : क्या कहता है ज्योतिष ? कौन जीतेगा, राजनेताओं का भविष्य ?

चुनाव 2019 : क्या कहता है ज्योतिष ? कौन जीतेगा, राजनेताओं का भविष्य ?
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चुनाव 2019 : क्या कहता है ज्योतिष ? कौन जीतेगा, राजनेताओं का भविष्य ?

चुनाव 2019 : क्या कहता है ज्योतिष ?

रविवार, 10 मार्च 2019  को चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया था। शाम को 5 बजे हुई प्रेस कांफ्रेंस में चुनाव आयोग ने इनकी घोषणा की। लोकसभा चुनाव 7  चरणों में होंगे। पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को होगा। दूसरे चरण का मतदान 18 अप्रैल, तीसरे चरण का मतदान 23 अप्रैल, चौथे चरण का मतदान 29 अप्रैल, पांचवें चरण का मतदान 6 मई, छठे चरण का मतदान 12 मई और अंतिम व आखिरी चरण का मतदान 19 मई को होगा। लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही देश में आचार संहिता भी लागू हो गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने मीडिया के समक्ष लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया। बता दें, पिछले लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान भी रविवार को किया गया था। इस बार भी रविवार को ही तारीखों का ऐलान किया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बताया कि चुनाव के लिए परीक्षाओं और त्योहरों को ध्यान में रखा गया। सभी राज्यों के मुख्य सचिव से बात की। इस बार 8 करोड़ 43 हजार वोटर बढ़े हैं। चुनाव में 10 लाख बूथ पर 90 करोड़ वोटर वोट डालेंगे। उन्होंने बताया कि 18 से 19 साल के डेढ़ करोड़ वोटर हैं। 99.3 फीसदी वोटर के पास आईडी कार्ड हैं। मतदान केंद्रों में पानी व बिजली का खास ध्यान रखा जाएगा। 10 लाख बूथ पर वोट डाले जाएंगे। ईवीएम पर उम्मीदवार की तस्वीर होगी। सभी बूथ वीवीपेट मशीन होगी।

लोकसभा चनाव 2019  का कार्यक्रम

7 चरणों में होगा मतदान

1st Phase – 11th April

2nd Phase – 18th April

3rd Phase – 23rd April

4th Phase – 29th April

5th Phase – 6th May

6th Phase – 12th May

7th Phase – 19th May

चुनाव आयोग ने रविवार को पांच बजे प्रेस वार्ता शुरू की लेकिन ज्योतिष के अनुसार यह ‘राहु काल’ का अशुभ समय है। उज्जैन के ज्योतिर्विद पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि ‘हर दिन ‘राहुकाल’ डेढ़ घंटे का होता है। रविवार को यह शाम को आम तौर पर होता है। उनके अनुसार राहुकाल में नए काम नहीं शुरू करने चाहिए। इसे अच्छा नहीं माना जाता हैं।

पहली जनवरी, 2019 को मंगलवार, सूर्य- शनि के योग तथा वृश्चिक राशि में नव वर्ष का आरंभ हुआ था।

यदि 5 अप्रैल को आरंभ होने वाले परिधावी नामक, नव संवत 2076 के अनुसार देखें तो दो विपरीत ग्रह, राजा शनि तथा मंत्री सूर्य हैं। बीच बीच में सभी ग्रह राहु- केतु के मध्य आ जाने से कालसर्प योग भी बना हुआ है।

मंगलवारी संक्राति, मास में 5 मंगलवार, 5 ग्रहण, वर्ष का आरंभ मंगलवार को, सूर्य – शनि का समसप्तक योग, कुछ राज्यों में सत्ता परिवर्तन, हिंसक घटनाएं, अग्निकांड, बमकांड, अराजकता, युद्धमयी वातावरण इंगित करते हैं।

भारत की कुंडली , 15 अगस्त, 1947 रात्रि, 12 बजे 

नरेन्द्र दामोदर दास मोदी की 17 सितंबर, 1950, महसाना 

प्रधान मंत्री पद के दावेदार राहुल गांधी की 19 जून, 1970, दिल्ली

भाजपा की 6 अप्रैल 1980, दिल्ली तथा अन्य कई गूगल पर उपलब्ध (जानकारी के आधार पर) ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर यहां भविष्यवाणी की जा रही है।

2019 के लोकसभा चुनाव में परिणाम आश्चर्यजनक एवं अप्रत्याशित ही होंगे। कई राज्यों में भाजपा गठबंधन फीका रहेगा परंतु बंगाल, असम, कर्नाटक, गुजरात व पूर्वी राज्यों में वोट प्रतिशत बढ़ेगा। कहते है पूरा संसार नवग्रहों का खेल है जिन्हे कृपा होती है वो ही इसे समझ पाते है तथा बुद्धि मॆ स्थिरता पाते है। भगवतकृपा से जो माया को समझता वो ही भवसागर से मुक्त हो पाता है यह कृपा ईश्वरकृपा से निश्छल मन वाले ही प्राप्त कर पाते है। ग्रह आदमी को कभी बुलंदी पर तो कभी धूल मॆ मिला देते है। कुंडली मॆ चौथे भाव से जनता से मिलनेवाला सम्मान, सम्पत्ति तथा सुख के विषय मॆ विचार किया जाता है।

केंद्र में कुल मिला कर गठबंधन सरकार ही बनेगी जिसमें कई नए घटक शामिल हो सकते हैं। यह नव निर्मित गठबंधन सरकार हो सकती है परंतु ग्रहयोग के अनुसार नेतृत्व मोदी ही करेंगे।

2019 में नव संवत 2076 के अनुसार राजा शनि तथा मंत्री सूर्य होंगे जो एक दूसरे के परस्पर शत्रु ग्रह हैं। इस ग्रह – गठबन्धन से जनता में तनाव बढेगा परंतु न्याय पालिका सशक्त रहेगी।

‘मोदी हटाओ -भाजपा भगाओ ‘ के नारे विफल रहेंगे तथा विपक्षी पार्टियों का ‘ महागठबंन्धन ‘ कुल मिला कर आपसी समन्वय न होने के कारण ‘ बैक टू स्केयर ‘ हो जाएगा। सत्तारुढ़ एवं विपक्षी दल जनता से पैसा बटोरने की फिराक में रहेंगे। समाज का निम्न एवं उच्च वर्ग सरकारी नीतियों से लाभान्वित होगा परंतु मध्यम वर्ग भाजपा शासन में और पिसेगा।

कालसर्प योग के कारण चुनावों में दोनों मुख्य दलों की हालत पतली रहेगी।

राजनेताओं का भविष्य

नरेंद्र मोदी की कुंडली

जनता के अच्छे दिन आए ना आए लेकिन भविष्यवाणी ने साफ कर दिया कि आखिर अच्छे दिन किसके आएंगे और कौन प्रधानमंत्री बनेगा चलिए अब अब आपको बता दें की भविष्यवाणी किससे के बारे में की गई।

नरेन्द्र मोदी का जिनका जन्म 17 सितंबर, 1950 को हुआ है, पहले से और अधिक सशक्त होंगे तथा कर प्रणाली में कई परिवर्तन करेंगे। इस साल मोदी नए विचारों से ओतप्रोत रहेगे और कई प्रकार के नए आर्थिक व सामाजिक प्रयोग करेंगे।

17 सितंबर 1950 को दोपहर 12:09 पर गुजरात में जन्मे प्रधानमंत्री मोदी की जन्म कुंडली लग्न और वृषभ राशि के चंद्रमा से प्रभावित हैं। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि मोदी की कुंडली में बन रहा चंद्र योग का नीच योग इनको जनता का प्रेमी तो बनाए रखेगा लेकिन दूसरी और मंगल के शत्रु भाव का स्वामी उन्हें जनता का विरोधी भी बना रहा है।

इस वर्ष 2019 की कुंडली बताती है कि इन्हें अगले 1 साल में अपने राजनीतिक जीवन में सबसे ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि शुक्र की विशोंत्तरी की दशा पीएम मोदी पर 2018 से 2020 तक रहेगी। इसी बीच 2019 के चुनाव पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

आपको बता दें कि सप्तमेश शुक्र वर्गोत्तम होकर सत्ता स्थान यानी दशम भाव में है जो कि उनको 2019 के आम चुनावों में वापस लाने का भी योग दिखा रहा है लेकिन साथ ही बताया गया है कि अंतर्दशा नाथ शुक्र के हानी भाव का स्वामी होने के कारण इनकी राजनीतिक जीवन में बदलाव के योग है।

यह वर्ष 2019 पीएम मोदी के लिए सबसे बुरा वर्ष है और इनके विरोधी भी इन पर हावी दिख रहे है। पीएम मोदी की कुंडली में कुछ ग्रह तो ऐसे हैं जो उनका साथ देंगे और इन्हें वापस सत्ता में लाने का पूरा प्रयास करेंगे।पीएम मोदी की कुंडली में चंद्रमा की महादशा का प्रभाव है।

उनकी कुंडली में इसका प्रभाव साल 2021 तक रहने की उम्मीद है। इसका प्रभाव कई बार उदासीन और कई बार लाभकारी होता है। लेकिन उनकी कुंडली में बार-बार बुध आता है। यानी उनकी कुंडली में बुध का अंतर आ रहा है।

लेकिन सबसे बड़ी बात कि उनकी कुंडली में केतू के आने के संकेत मिल रहे हैं।

वृश्चिक लग्र के होने चलते उनके लिए केतू का प्रभाव हानिकारक ना होकर उदासीन या कई बार लाभ पहुंचाने की स्थिति में होगा। साथ ही केतू और वृश्चिक राशि में बृहस्पति पंचमेश की स्थिति कठिन समय में किस्मत बदल देने के लिए जानी जाती है। मार्च 2019 से पीएम मोदी की कुंडली में यह प्रभाव शुरू होने वाला है।  नरेंद्र मोदी भारत देश के प्रधानमंत्री, पर आगे का सफर मुश्किल है ।

वृषभ लग्न की कुंडली के दशम भाव को देख रहे गुरु शनि और बुध इनको केंद्र की सत्ता दिलाने का संकेत दे रहे हैं. इस भविष्यवाणी में मोदी से लेकर बीजेपी तक की कुंडली का बयान किया गया बीजेपी 1980 से सत्ता में आई और 2012 से सूर्य की महादशा आरंभ हुई ।सूर्य की महादशा ने इन्हें 2014 का चुनाव जीतने के लिए योगदान दिया। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री का कहना है कि सूर्य की महादशा केवल 6 साल तक ही साथ देती है और वह 2017 में वो पूरी हो चुकी जिसका फल भी बीजेपी को मिला लेकिन अब बीजेपी की कुंडली खतरे से खाली नहीं है।इनका समय बिल्कुल भी अच्छा नहीं चल रहा जिससे तमाम आरोप लग रहे हैं 10 साल के लिए बीजेपी को नुकसान झेलना पड़ सकता है।

अभी भी बीजेपी में केवल एक ही नेता है जो सत्ता दिला सकता है वह स्वयं पीएम मोदी है क्योंकि कहा गया है कि पीएम मोदी की कुंडली में 2019 के बाद केतु का अतर आ जाएगा। केतु इन का भाग्य पलट कर इन्हें सत्ता में ला सकता है. इस प्रकार 2019 तय कर देगी कि किस का भाग्य साथ देगा और किसे सत्ता मिलेगी।

वर्तमान प्रधान मंत्री की कुंडली के अनुसार उनकी साढ़ेसाती के साथ 6 माचर्, 2019 तक चंद्र- बुध की दशा है जिसके कारण 5 राज्यों में उनका नेतृत्व क्षीण रहा।

27 फरवरी 2019 से चन्द्रमा में केतु का अन्तर 27 फरवरी 2019 से चन्द्रमा में केतु का अन्तर शुरू हो जायेगा जो 28 सितम्बर 2019 तक चलेगा। केतु आपकी कुण्डली में लाभ भाव में सूर्य, बुध के साथ बैठा है। केतु की पंचम दृष्टि जनता के संकेतक भाव पंचम पर पड़ रही है।

केतु एक अशुभ ग्रह है जिसकी जिस स्थान पर दृष्टि पड़ती है, उस स्थान की हानि होती है। चन्द्रमा आपके भाग्य भाव का स्वामी होकर लग्न में नीच का होकर बैठा है। चन्द्रमा एक शुभ ग्रह है और केतु एक अशुभ ग्रह इन दोनों का कार्यकाल बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता है। मोदी की राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। शनि तृतीयेश व चतुर्थेश होकर दशम भाव में अपने मित्र शुक्र के साथ में बैठा है, इसलिए शनि की साढ़ेसाती मोदी के लिए कष्टकारी साबित हो सकती है।

22 अप्रैल से गुरु भाग्य को उच्च दृष्टि से देखेगा ओर उन्हें पुनः उच्च पद देगा। संक्षेप में कहें तो मोदी 2019 में पुनः प्रधान मंत्री बनेंगे और विषम परिस्थ्तियों में भी ,भारत की वैश्विक छवि तथा अपनी आभा को और निखारेंगे।

कुछ विशेष तथ्य

वर्तमान में मोदी की पत्री में चन्द्रमा की महादशा में बुध की अन्तर व शनि की प्रत्यन्तर दशा चल रही है। चन्द्रमा भाग्येश होकर नीचभंग राजयोग का निर्माण कर रहा है। लग्न में मंगल के साथ चन्दमा की युति है। मोदी जब-तक स्वंय के विवेक के आधार पर निर्णय लेेते रहेंगे तब-तक सब कुछ बेहतरीन होता रहेगा। जैसे ही किसी के बहकावे में आकर कार्य करेंगे तो छवि धूमिल हो सकती है। शनि तृतीयेश व चतुर्थेश होकर राजनीति के कारक भाव दशम में अपने मित्र शुक्र के साथ बैठा है। शनि की यह स्थिति उत्तम है। शनि की दशा में मोदी की लोकप्रियता बनी रहेगी।

2019 के लोकसभा चुनाव  – 2019 लोकसभा चुनाव की ज्योतिष भविष्यवाणी

सन् 2019 लोकसभा के चुनाव 7  चरणों में होंगे। पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को होगा और अंतिम व आखिरी चरण का मतदान 19 मई 2019 को होगा।

उस समय पीएम नरेंद्र मोदी जन्म कुंडली में चन्द्रमा की दशा में केतु का अन्तर और शुक्र प्रत्यन्तर चल रहा होगा। गोचर में गुरू वक्री होकर धनु राशि में, शनि व केतु भी धनु राशि में रहेगा। राहु मिथुन राशि मेें गोचर करेगा। गुरू आपके दूसरे भाव में गोचर करेगा जिसकी पंचम दृष्टि छठें भाव पर, सप्तम दृष्टि अष्टम भाव पर व नवम दृष्टि सत्ता के संकेतक भाव दशम पर पड़ेगी। मिथुन का राहु आपके अष्टम भाव में गोचर करेगा। अष्टम भाव का राहु अचनाक समस्यायें उत्पन्न करता है। केतु धनु राशि में रहेगा जो आपके दूसरे भाव में गोचर करेगा। केतु की यह स्थिति शुभ कही जा सकती है।नरेन्द्र मोदी दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री अवश्य बनेंगे।

इन सभी ग्रहों के संकेतो को मिलाकर निष्कर्ष यह निकलता है अगामी लोकसभा चुनाव 2019 मोदी के लिए कठिन संघर्षो भरा रहेगा। किन्तु केतु आपकी कुण्डली में लाभ भाव में बैठकर जनता के कारक भाव पचंम को सप्तम दृष्टि से देख रहा है। केतु ध्वज का प्रतीक है, इसलिए एक बार फिर से मोदी का झण्डा केतु ऊंचा करेगा। अप्रैल में सूर्य का प्रत्यन्तर शुरू हो जायेगा। इसी दौरान लोकसभा चुनाव होने के संकेत है।

सूर्य भी लाभ भाव में बैठकर पंचम भाव को देख रहा है। अंक ज्योतिष के अनुसार अगली 17वीं लोकसभा होगी और 17 तारीख मोदी का जन्मदिवस है। यह एक बहुत ही शुभ संयोग है। इन सभी ज्योतिषीय तथ्यों के आधार पर मैं पूर्ण विश्वास के साथ कह सकता हूं कि 17वी लोकसभा में पूर्ण बहुमत के साथ तो नहीं लेकिन नरेन्द्र मोदी दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री अवश्य बनेंगे।

1. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का गठन 6 अप्रैल 1980 को हुआ। उसके अनुसार बीजेपी मिथुन लग्र और वृश्चिक राशि की पार्टी हुई। इसके अनुसार बीजेपी की कुंडली में अक्टूबर 2012 से ही सूर्य की महादशा शुरू हुई थी।

2. सूर्य की महादशा का प्रभाव कुंडली में 6 साल तक रहती है।

बीजेपी की कुंडली में सूर्य की महादशा का परिणाम

कुंडली में सूर्य की महादशा का होना अत्यंत लाभदायक माना जाता है। ज्योतिषाचार्य का कहना है कि यह सूर्य की महादशा का ही प्रभाव था कि बीजेपी ने साल 2012 के अंत तक तत्कालीन गुजरात सीएम नरेंद्र मोदी को पीएम पद उम्मीदवार बना दिया।

छह सालों तक बीजेपी ने धुआंधार चुनावों में जीत दर्ज की। पार्टी ने कई मसलों पर विपक्ष को चारो खाने चित्त कर दिया।

साल 2017 के अक्टूबर माह में बीजेपी की कुंडली में सूर्य की महादशा में शुक्र की महादशा ने दस्तक दे दी।

सूर्य  की महादशा का प्रभाव आमतौर पर 6 साल तक माना जाती है।

बीजेपी की कुंडली में शुक्र की महादशा का परिणाम

अक्टूबर 2017 से ही बीजेपी के लिए बुरा समय शुरू हुआ था। साल के शुरुआत में हुए कर्नाटक चुनाव में बड़ी किरकिरी के साथ सत्ता भी गंवानी पड़ी। जबकि योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरफपुर में हार का सामना करना पड़ा। फूलपुर, कैराना भी गंवानी पड़ी।

इसके बाद पार्टी पर तरह-तरह के आरोप लग रहे हैं। चूंकि यह महादशा आगामी 10 सालों तक रहने वाली है। इसिलए साल आगामी तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव भी उसके लिए बेहतर होने की उम्मीद नहीं हैं।

 

श्रीमती सोनिया गांधी

श्रीमती सोनिया गाँधी का जन्म 9 दिसंबर, 1946 को रात्रि 9.15 बजे इटली के तुरीन में हुआ था। जन्म 9/12/1946 को इटली के वेनेटो क्षेत्र में पड़ने वाले विकैंजा नामक स्थान से 30 किमी. की दूरी पर स्थित एक छोटे से गांव लुसियाना में हुआ था।इनकी राशि मिथुन है। कर्क लग्न में हुआ था।इनकी कुंडली में मालव्य महापुरुष योग, बुधादित्य योग, सुनफा योग, उभयचर योग, काहल योग, अमर योग, धन योग और दान योग हैं। सोनिया गांधी की कुंडली में कर्क लग्न है जिसे कुशल राजनीतिज्ञों का लग्न माना जाता है। लग्न में बैठा हुआ शनि भी जातक को कूटनीतिज्ञ तथा कुशल प्रशासक बनाता है।चंद्र कुंडली से पंचम भाव में विराजमान गुरु व शुक्र ने भी इन्हें राजनीति का पंडित बनाया। यदि चर लग्न हो और गुरु, शुक्र तथा शनि केंद्रों में हों तो अंशावतार योग होता है। ऐसा जातक बहुत बड़ी शखिसयत होता है और उसे युग पुरुष माना जाता है। सोनिया की जन्मकुंडली में शनि वक्री होकर लग्न में स्थित है। वर्तमान समय में वह बुध ग्रह कहीं महादशा में शनि ग्रह की अंतर्दशा से गुजर रही है। शनि सप्तमेश व अष्टमेश है। गुरु षष्टेश व भाग्येश है। ऐसे में इस अंतर्दशा में इनकी प्रतिष्ठा निरंतर बढ़ती नजर आती है।इन्होंने अपनी किशोरावस्था के समय ट्यूरिन के समीप ओर बासानो नामक स्थान पर रोमन कैथोलिक स्कूल में पढ़ाई की। इनके पिता एक विल्डिंग कॉन्ट्रेक्टर थे जिनकी वर्ष 1983 में मृत्यु हो गई। इनकी मां और दो बहनें ओरवासानो के आस पास ही रहती हैं। वर्ष 1964 में वे इंग्लिश पढ़ने के लिए कैंब्रिज गई जहां सन् 1965 में इनकी मुलाकात राजीव गांधी से एक ग्रीक रेस्टॉरेंट में हुई।सोनिया और राजीव ने वर्ष 1968 में विवाह कर लिया और इस प्रकार इनका पदार्पण इनकी सास व तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रमति इंदिरा गांधी के घर हुआ। वर्ष 1970 में इन्होंने बेटे राहुल गांधी तथा 1972 में पुत्री प्रियंका गांधी को जन्म दिया। प्रभावशाली नेहरु परिवार के सदस्य होने के बावजूद भी सोनिया व राजीव गांधी ने अपने आपको राजनीति से पूर्णतया दूर रखा। राजीव गांधी एयरलाइन पायलट का कार्यभार संभाला व सोनिया गांधी ने घर की देख रेख का जिम्मा संभाला। 23 जून 1980 को एक हवाई हादसे में संजय गांधी की मृत्यु हो जाने पर सन् 1982 में राजीव गांधी ने राजनीति में प्रवेश किया। सोनिया ने परिवार की देखभाल करना जारी रखा और जनता से किसी भी प्रकार का संपर्क न रखा। सोनिया गांधी का भारतीय जनता से संपर्क शुरू हुआ उनकी सास श्रीमति इंदिरा गांधी की हत्या तथा पति के प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद। 1984 में सोनिया गांधी ने अपने पति के अमेठी से चुनाव लड़ने के समय राजीव गांधी का जोरदार चुनाव प्रचार किया। उस समय राजीव के विरूद्ध उनके स्वर्गीय भाई की पत्नी मेनका गांधी चुनाव में उतरी थी।

वस्तुतः उनका राजनीतिक ग्राफ ढलान पर रहेगा परंतु कहीं न कहीं वे राहुल की सहायता के लिए आगे आती रहेंगी। स्वास्थ्य की दृष्टि से उन्हें पेट संबंधी परेशानी हो सकती है। वे विश्रामावस्था में जा सकती हैं।

कर्क लग्न, मिथनु राशि, एकादश में उच्च का राहु, लग्न में कर्क का शनि, पंचम स्थान में सूर्य बुध के साथ, उच्च का केतु वाले जातक शासन व सत्ता की सीधी भागीदारी की अपेक्षा रिमोट कंट्रोल ऑपरेटर की भूमिका ज्यादा पसंद करते हैं।

ऐसे व्यक्ति दृढ़ निश्चयी, उपलब्धियों के लिए समझौता न करने वाली प्रवृत्ति के होते हैं। चंद्रमा के घर में सप्तमेश की स्थिति गृहस्थी के सुखों से वंचित करती है।

कुंडली के प्रभाव से भविष्य में भी इनके राजपद प्राप्त करने की संभावना नहीं है। पिछले वर्ष शनि के प्रभाव से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं रही होंगी। फरवरी माह के प्रारंभ में यह समय समाप्त हो गया। वर्तमान समय में सात साल की केतु की महादशा चल रही है। यह समय भी नई-नई योजनाएं बनाने एवं उनके क्रियान्वयन के लिए उपयुक्त अवसर है।

राहुल गांधी

राहुल गांधी का जन्म 19 जून 1970 को दोपहर 02 : 28 में नई दिल्ली में हुआ है. इस समय के अनुसार राहुल गांधी की जन्म कुंडली तुला लग्न की है. वहीं इनकी चंद्र राशि धनु है. 2012 से ही राहुल गांधी की कुंडली पर साढ़े साती चल रही थी जो अब समाप्त होने वाला है. वर्ष 2019 से मंगल की महादशा आरंभ होगी, जो राहुल गांधी का भाग्योदय करा सकता है.

राहुल गांधी की राशि में मंगल की महादशा चल रही है. ये मंगल मारकेश में है और भाग्य में बैठा हुआ है. 2019 वर्ष कुंडली को देखें तो ये वर्ष राहुल गांधी के लिए काफी अच्छे संकेत दे रहा है. राहुल गांधी के लिए प्रत्यक्ष राजयोग के प्रबल योग दिख रहे हैं.

राहुल गांधी का जन्म 19 जून 1970 में हुआ। जैसे ही गुरु सितंबर 2017 में तुला राशि में आए , इन्हें उच्च पद प्राप्त हो गया और कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया। लोकसभा चुनावों में ये अपनी छवि और निखार पाएंगे। राहुल गांधी की भी साढ़ेसाती चल रही है परंतु शनि नीच राशि में होने के कारण अभी उनका प्रधानमंत्री बनना संदिग्ध रहेगा हालांकि 9 अप्रैल के बाद उनकी छवि ओैर निखरेगी। कांग्रेस पार्टी की कुंडली में शनि लग्नस्थ है परंतु अन्य ग्रह योगों के अनुसार कुछ नए गठबंधन बनने तथा कई राज्यों में अच्छे प्रदर्शन के बावजूद, यह पार्टी केंद्र में सत्ता प्राप्त नहीें कर पाएगी।

राहुल गांधी की कुंडली मिथुन लग्न एवं वृश्चिक राशि की है। चंद्रमा और शनि नीचस्थ हैं तो वहीं त्रिकोण का गुरु नवमांश में वर्गोत्तम का है। अप्रैल 2007 से चंद्रमा की महादशा चल रही है जो जातक को सक्रिय राजनीति की तरफ ले आई है।

वर्तमान में शनि की अंतरदशा चल रही है। गोचर में शनि तुला राशि का है एवं वृश्चिक राशि पर साढ़ेसाती की भी शुरुआत हो चुकी है। गोचर-मेष के गुरु की दृष्टि शनि पर पड़ रही है। छठे स्थान के राहु के कारण परिणाम शुभ होने के संकेत हैं। उनके नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी का विस्तार होगा और सफलता मिलेगी।

बहुत से लोगों के मन में ये सवाल चल रहा है कि क्या राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बनेंगें या एक बार फिर से राहुल गांधी के हाथ असफलता ही लगेगी. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सितारे वर्ष 2019 में कैसे रहेंगे, इसे लेकर सबके मन में कौतूहल है.

ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि राहुल गांधी लाभ भाव में विराजमान सप्तमेश चंद्रमा की महादशा में लग्नेश और धनेश शनि की अंतर्दशा चल रही है. ये कुछ हानि के बाद लाभ प्रदान करती है. पंडितों के अनुसार राहुल गांधी शनि की साढ़े साती का अंतिम चरण चल रहा है. जाता हुआ शनि काफी शानदार परिणाम लेकर आता है. जानकारों के अनुसार समय अनुकूल रहा तो राहुल गांधी अप्रत्याशित रुप से देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हो सकते हैं.

अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर 1952 को एक पंजाबी हिंदू ब्राह्मण परिवार में हुआ।

पिता महाराज किशन पेशे से वकील थे।

अरुण जेटली ने नई दिल्ली सेंट जेवियर्स स्कूल से 1957-69 तक पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और डीयू से 1977 में लॉ की डिग्री ली। अपनी पढ़ाई के दौरान जेटली को अकादमिक और पाठ्येतर क्रियाकलापों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कई सम्मान मिले. डीयू में पढ़ाई के दौरान ही वे 1974 में डीयू स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष बने। जेटली सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता के पद पर भी रह चुके हैं।

अरुण जेटली की कुंडली में प्रथम भाव में सूर्य स्थित होने से अरुण को दीर्घसूत्री स्वभाव वाला बनाता है एवं जिस राशि पर सूर्य विद्यमान है उसके प्रभाव से धनी एवं लोकविख्यात है।

अरुण जेटली की सूर्य स्थिति (कुंडली अनुसार) जेटली को पितृ प्रवृत्ति का बनाती है। धन में उतार-चढ़ाव बहुत रहता है। परंतु गुरु राशि में स्थित होने से प्रभाव कम होता है। कुंडली में चंद्र स्थिति अरुण को अच्‍छी भूमि का स्वामी बनाती है एवं इसके प्रभाव से विपक्षी पर विजय प्राप्त करने में सक्षम रहते हैं।

वृषभ राशि का चंद्रमा होने से दानी एवं क्षमाशील बनाता है। इसी के साथ भौम की स्थिति परिवार अथवा अपने मिलने वालों से सहयोग कम प्राप्त होने के योग बनाता है। भौम शनि की राशि कुंभ में विराजमान होने से मिथ्यावादी बनाता है। अत: अपने भाषण में अथवा जीवन में इसका ध्यान रखें। इसी के साथ शिव आराधना करें। कुंडली में बुध की स्थिति जेटली को शत्रु पर विजय पाने वाला बना रही है एवं हर प्रकार के सुख वैभव को प्राप्त कराती है। गुरु राशि में विराजमान रहने से धनी एवं सुखी बनाता है।

स्वयं से ज्यादा गृहस्थी के भाग्य का सुख मिलता है। शुक्र की स्थिति के कारण धन सुख, बंधु-बांधव का सुख असंतुष्ट महसूस करता है। अर्थात सब सुख होने पर भी व्यक्ति पूर्ण संतुष्ट नहीं रहता है। दान देने में घबराता है एवं स्त्री से कम अनुराग रखता है। अरुण जेटली की कुंडली में शनि राज्य सुख का अधिकार दिलाने वाली स्थिति में शनि विराजमान है एवं धन में स्थिरता लाता है। शनि मन को स्थिर बनाने की स्थिति में शनि विराजमान है। राहु का प्रभाव अरुण जेटली को निर्भय बनाता है एवं विपक्षी को पराजित करने की क्षमता बढ़ाता है।

केतु की स्थिति गुप्त रोग की ओर संकेत करती है। अत: ध्यान देना चाहिए अरुण जेटली का जन्म सूर्य की महादशा में हुआ जिसका भाग्यकाल 1 वर्ष 9 माह 14 दिन रहा।

इस वर्ष जेटली जी आर्थिक सुधारों और बैेंकिंग प्रणाली को और सुदृढ़ बना पाने में सक्षम रहेंगे और 2019 में उनके मंत्रालय बदलने की कोई संभावना नहीं है। सेहत के प्रति विशेष ध्यान रखना होगा।

राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह का जन्म 13 फ़रवरी 1950 को रात्रि 23 बजकर 19 मिनट पर  बनारस के एक गाँव मे हुआ । अनेक वेबसाइटों पर उनकी जन्म तिथि 10 जुलाइ दी गयी है जो की ठीक नही है  और ज्योतिष् के मानदंडों को पूरा नही करती है ।

राजनाथ सिंह का जन्म उत्तरप्रदेश के चन्दौली जिले के भौरा गाँव में एक क्षत्रिय परिवार में हुआ था। उनके पिता रामबदन सिंह का मुख्य पेशा कृषि था। कृषक परिवार से होने के बावजूद राजनाथ सिंह मेधावी छात्र रहे। गोरखपुर विश्वविद्यालय से भौतिकी में प्रथम श्रेणी में एम.एससी. करने के उपरान्त वे मिर्जापुर के के.बी. स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भौतिकी के व्याख्याता बने, लेकिन नियति को और ही मंजूर था। उन्होंने कुछ समय के पश्चात् व्याख्याता पद छोड़ दिया और राजनीति में आ गए। चतुर्थ और दशम के राहु-केतु उन्हें व्याख्याता पद से ही सन्तुष्टि प्रदान नहीं करने देते। इससे पूर्व, मात्र 13 वर्ष की अवस्था से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए। बाद में नौकरी के दौरान ही वे भारतीय जनसंघ के कार्यकर्ता बन गए। सन् 1975 में उन्हें भारतीय जनसंघ का मिर्जापुर जिले का अध्यक्ष बनाया गया। सन् 1975 में वे जे.पी. आन्दोलन में कूद पड़े और 1975 से 1977 में इमरजेंसी के दौरान दो बार जेल में गए। वृश्चिक लग्न जुझारू प्रवृत्ति एवं लक्ष्य के प्रति एकनिष्ठता की द्योतक है। लग्नकुण्डली में गजकेसरी योग बन रहा है। पंचमस्थ स्वराशि के गुरु ने उन्हें अपार लोकप्रियता प्रदान की है। भाग्येश चन्द्रमा एवं पंचमेश गुरु के मध्य परस्पर दृष्टि सम्बन्ध है और प्रजातन्त्रकारक शनि के साथ भाग्येश चन्द्रमा का युति सम्बन्ध भी है। इन सबके परिणामस्वरूप राजनीति में उन्हें भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त हो रहा है। यही कारण है कि उनके राजनीतिक जीवन में सफलताएँ अधिक हैं, असफलताएँ कम।

25  मार्च 1997 को वे भारतिया जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त हुए इस काल खंड मे उन्हो ने ना सिर्फ़ संगठन को मजबूत बनाया बल्कि दो बार प्रदेश सरकार को गिरने से बचाया ! और उसी समय पार्टी को लोकसभा मे सर्वाधिक 58 सीटें उत्तर प्रदेश से मिली । 1997 से पहले वह कोई बड़े और महत्वपूर्ण नेता नही थे ।

यह दशा छिद्र या दशा संक्रमण का काल थ.रहु की दशा समाप्त होने वाली थी और बृहस्पति की महादशा शुरू होने वाली थी और यही से एक आम आदमी के बड़े नेता बनने का समय शुरू होता है ।

अक्तूबर 1997 मे राजनाथ सिंह बृहस्पति की स्थिति मे आए । उनका बृहस्पति बहुत ही मजबूत है यह छठे घर का स्वामी होकर नीच का है और चौथे घर मे शुक्र और बुध के साथ बैठा है । वह तुला लग्न के है तुला का मतलब संतुलन । राजनाथ की ज़ुबान विपरीत परिस्थितियों मे भी नही फिसलती । इसके और भी कारण हैं । उनका बुध जो किसी भी पापी ग्रह से पीड़ित नही है बृहस्पति और लग्न के स्वामी शुक्र के साथ चौथे सिंहासन के भाव मे बैठा है । बुध बृहस्पति एक दूसरे को नवांश और दशांस दोनो वर्ग कुंडलियों मे भी एक दूसरे को देख रहे है है और एक ही धुरी पर हैं ।

उन्हें अभी शनि की भी साढ़सती चल रही है और ये 2020 तक काफी प्रभावशाली रहेंगे।

अमित शाह 

अमित शाह का जन्म 22 अक्टूबर 1964 को सुबह 6:25 बजे अहमदाबाद में हुआ था। अनका लग्न है तुला और बुधादित्य योग भी है। लग्नेश लाभ में यानी की 11वें भाव में है। राहू नवम भाव में, केतु तीसरे भाव में, चंद्र मेष का स्वग्रहित उच्च का पंचम में, मंगल दशम में, शत्रु राशि में विद्यमान है। केंद्र में मंगल बैठा है। कुंडली के सातवें भाव में जगकेसरी योग बन रहा है। केंद्र के मंगल और गजकेसरी योग से अमित शाह को राजयोग मिल रहा है। लग्न में सूर्य और बुध विद्यमान है।

अमित शाह की कुंडली में शुक्र बारहवें भाव में विराजमान है लेकिन वो पांचवें भाव के स्वामी शनि पर परस्पर दृष्टि ड़ाल रहा है। जो कि अत्यधिक प्रतिष्ठित लोगों के साथ विपुल धन, प्रसिद्घि आैर अच्छे संबंध प्रदान करता है। राहु-शुक्र की अवधि पब्लिक लाइफ में बहुत बड़ी सफलता के संकेत देती है। अनुकूल दशा अवधि ओर गुरू के लाभदायी गोचर से प्रतिकूल प्रभाव को कुछ हद तक निष्फल करने में मदद मिलेगी। लेकिन अमित शाह की कुंडली में ग्यारवें भाव के स्वामी चंद्र आैर आठवें भाव के स्वामी मंगल की युति हो रही है। साथ ही, मंगल प्रतिकूल है आैर बारहवें भाव के स्वामी के साथ बैठा है। ये दोनों ही पहलू शाह की सेहत के लिए प्रतिकूल है। अतः वर्ष 2018 के दौरान कर्क में मंगल-केतु की युति का उनके स्वास्थ्य पर विपरित असर पड़ेगा।

इनकी दशा 2019 से 2020 के मध्य सेहत के लिए खराब रह सकती है। राजनीतिक तौर पर 2019 का लोकसभा चुनाव इनके नेतृत्व में कुछ कमजोर रहेगा फिर भी केंन्द्र में सरकार भाजपा की ही लौटकर आएगी। कांग्रेस कुछ मजबूत होगी । भाजपा कुछ राज्यों में कमजोर पड़ेगी और कहीं इसे गठबंधन का सहारा लेना पड़ सकता हें। अमित शाह का जन्म एक बड़े व्‍यवसायी अनिलचंद्र शाह के घर 1964 में हुआ। उन्होंने बायोकेमेस्ट्री में बीएससी तक शिक्षा प्राप्त की।

साथ ही पिता के व्‍यवसाय से जुड़ गए। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जरिए भाजपा में प्रवेश किया। मार्च में उन्हें भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया।

गुजरात स्टेट चेस एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे तथा गुजरात राज्य क्रिकेट एसासिएशन के उपाध्यक्ष भी रहे। गुजरात के पूर्व गृहमंत्री तथा लालकृष्‍ण आडवाणी के सबसे करीबी माने जाते थे।

दरअसल, कुछ समय तक उन्होंने स्‍टॉक ब्रोकर का भी कार्य करने के बाद आरएसएस से जुड़ गए और उसके साथ ही बीजेपी के सक्रिय सदस्‍य भी बन गए। इसी दौरान भाजपा के वरिष्‍ठ नेता लालकृष्‍ण आडवाणी गांधीनगर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्‍व कर रहे थे। इस वक्त अमित शाह उनके करीब आए और गांधीनगर क्षेत्र में चुनाव के दौरान उनके साथ प्रचार-प्रसार किया।

प्रियंका गांधी

इस वर्ष अपने जन्मदिन के बाद , सक्रिय राजनीति में आ जाएंगी और छा जाएंगी। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी और श्रीमती सोनिया गांधी की सुपुत्री प्रियंका गांधी का जन्म 12 जनवरी 1972 को 13.59 बजे दिल्ली में हुआ था। प्रियंका इंदिरा गांधी की पोती हैं जो उनकी आला विरासत को बयान करता है।

ज्योतिष अनुसार इनका जन्म अनुराधा नक्षत्र में हुआ था, जिसके स्वामी शनि है राशि है वृश्चिक जिसके स्वामी मंंगल है।  दशम भाव में लग्नेश  शुक्र कुंभ राशि में स्थित है। शनि और शुक्र के मध्य एक ग्रह परिवर्तन राज योग बना हुआ है जो बहुत ही उम्दा है। जब भी कभी लग्र और दशम भाव के मध्य स्थान परिवर्तन योग होता है और वह दोनों ग्रह मित्र या कारक हो तो यह एक उच्चकोटि का राजयोग होता है। पण्डित दयानन्द शास्त्री बताते हैं कि लग्र का संबंध व्यक्तित्व से होता है और दशम भाव का राज्य से। शुक्र यहां पर लग्नेश है और शनि कारक। इसका सीधा-सा अर्थ है कि प्रियंका गांधी के इन दोनों ग्रह उन्हें कोने से निकाल कर सत्ता के मध्य में खड़ा कर दिया हें।

उनकी जन्माकालिक वृश्चिक राशि है। जन्म के समय लग्नाधिपति बुध की केंद्रवर्ती अवस्था एवं बृहस्पति की युति, नवमांश में बुध की स्वग्रही अवस्था, इन्हें राजनीति की दुनिया में अत्यंत लोकप्रियता प्रदान करने वाली है। पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार प्रियंका गांधी के जन्म के समय जनता से मिलने वाले सहयोग एवं प्रेम का अधिपति जहां बुध है, वहीं राजनीतिक सफलता के लिए आवश्यक पंचमाधिपति की अपने घर से पंचम अवस्था यहां प्रचंड रूप से जनता का समर्थन प्राप्त करने वाला सिद्ध होगा। वहीं आर्थिक एवं पारिवारिक ताकत की बात करें, जो कि जन्म से ही उन्हें प्राप्त है, उसे दशमेश पराक्रमेश एवं लग्नेश की केंद्रवर्ती युति आगे बढ़ाने वाली कही जायेगी। उनका उच्च का स्वामी बुध मजबूत स्थिति में है। इसी ने उन्हें तीव्र बुद्धि वाली महिला बनाया है। रॉबर्ट वाड्रा के साथ उनके प्रेम विवाह का योग उनकी जन्म कुंडली में साफ देखा जा सकता है। उनकी कुंडली के मुताबिक, 2003 से 20 साल के लिए प्रियंका शुक्र की दशा से गुजर रही हैं और यह उनके जीवन का सबसे अच्छा समय रहेगा। 21वीं सदी में वे जीवन का नया मुकाम देखेंगी।

कृष्ण पक्ष की एकादशी को जन्म लेने वाली प्रियंका गांधी का गुरु स्वराशि होकर सूर्य एवं बुध के साथ धनु राशि में बैठा है।

कुंडली में 10वें घर में बैठा मंगल उनकी कुंडली की खासियत है। विश्व के अनेक सेनाध्यक्षों की कुंडली में यही योग रहा है क्योंकि मंगल सैन्य बल और युद्ध क्षेत्र से सीधा संबंध रखता है लेकिन प्रियंका की कुंडली के मामले में इसने उन्हें कुलदीपक के समान ओज प्रदान की है।

शुक्र शनि की राशि कुंभ एवं शनि, शुक्र की राशि वृषभ में स्थित है, जो आकर्षक व्यक्तित्व प्रदान करता है।     मंगल मित्र मीन राशि में एवं राहु मित्र मकर राशि में है। केतु कर्क राशि में है।  नवांश कुंडली में सूर्य मंगल की युति एवं गुरु शुक्र की पूर्ण दृष्टि है।  उनका शुक्र मित्र शनि की राशि में  है। भाग्य स्थान में बलवान राहू भी भाग्य को आसानी से पूरी तरह से प्रकट नहीं होने देता। यह एक अलग किस्म की रहस्यमता यहां देखने को मिलती है। अगर लग्रेश व दशमेश सशक्त हो तो राहू प्रबल भाग्य प्रदान करता है। नवम भाव में राहू अगर अच्छा हो तो दो प्रकार के परिणाम देता है अगर खराब हो तो फिर भाग्य में अक्सर बाधाएं प्रस्तुत करता है।

ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि वर्तमान में प्रियंका गांधी को वर्तमान में उनकी ग्रह दशानुसार शुक्र की महादशा में राहु का अंतर चल रहा है।  शुक्र दशम भाव में और बृहस्पति अष्टम भाव में बैठ कर एक-दूसरे के साथ अच्छा संयोग बना रहे हैं।

आम चुनाव से ठीक दो महीने पहले कांग्रेस पार्टी ने जिस तरह प्रियंका गांधी को महासचिव बनाकर मास्टर स्ट्रोक खेला है, उससे क्या सत्ता पक्ष और क्या विपक्ष सभी हैरान हैं। विधिवत तरीके से राजनीति में पदार्पण करने वाली प्रियंका गांधी को लेकर कांग्रेस पार्टी का मानना है कि वह उनका तुरुप का पत्ता साबित होंगी और कांग्रेस के खोई प्रतिष्ठा को वापस दिलाएंगी। आज जब उन्होंने अपनी सक्रिय राजनीति में औपचारिक प्रवेश कर महासचिव का पद ग्रहण किया हें उस दिन चंद्र सिंह राशि में था। जो वृश्चिक से दशम होता है। इस आधार पर आने वाले समय प्रियंका गांधी बाढरा देश की राजनीति में बड़े बदलाव का कारण बनेंगी शनि जन्मकुंडली भाग्याधिपति होने के कारण उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के खोए हुए जनाधार को निश्चित रूप से वापसी की ओर ले जायेगा। अर्थात् यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि कांग्रेस आई के लिए प्रियंका गांधी का राजनीतिक प्रवेश अवश्य लाभकारी सिद्ध होगा। परंतु इन्हें गंभीर रूप से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का सामना भी करना पड़ेगा।

जन्म कुंडली के मुताबिक, प्रियंका के राजनीति में आने की संभावना बहुत कम थी, लेकिन यह भी तय है कि एक बार जब उन्होंने सियासत में कदम रख लिया तो पीछे मुडकर नहीं देखेंगी। लोग उन्हें अगाध प्रेम देंगे और पार्टी के लिए वे शानदार काम करेंगी।

विरोधी कितना भी उनको नजरंदाज करे, वह आगे आने वाले समय में  विशेषकर 24/1/2020 के बाद से सत्ता के क्षितीज में सितारा बनकर उभरेंगी।

आगे आने वाले समय में उनका सामना करना किसी भी विरोधी के लिए मुश्किल होंगा। वह पार्टी एवं सत्ता में शिघ्र ही अपना प्रभुत्व जमा लेंगी।

विशेष – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मकालिक राशि भी वृश्चिक ही है जो कि प्रियंका गांधी की है। ऐसे में राजनीति के मैदान में पीएम मोदी को राहुल गांधी से अधिक चुनौती प्रियंका गांधी से मिलेगी। यद्यपि दोनों की ही साढ़ेसाती चल रही है, जिसके फलस्वरूप मोदी जी उत्तर प्रदेश में न केवल पूर्व से बहुत कम सफलता प्राप्त करेंगे, अपितु प्रियंका गांधी के योगकारी शनि एवं बृहस्पति की उत्तम अवस्था के कारण भाजपा को एवं अन्य पार्टियों को गंभीर रूप से हानि होगी।

सितंबर 2019 तक प्रियंका गांधी को स्वयं के परिवार के उपर जहां राजनीतिक आघात का मुकाबला करना होगा, वहीं शासन-प्रशासन की तरफ से भी संकट का सामना भी करना पड़ सकता है। इस बीच प्रियंका गांधी एवं उनके परिवार, विशेष रूप से पति को शासन सत्ता का खासा विरोध झेलना पड़ेगा। लेकिन सितंबर 2019 के बाद बुध की अंतरदशा इन्हें भारतीय राजनीति के ध्रुव तारे की तरह प्रकाशित करेगी।

गणना और लेखन – ज्योतिषाचार्य पं. दयानंद शास्त्री, उज्जैन  

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FOR JIO— 07000394515..    

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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March 11, 2019 30 min read
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