क्या बिना धर्म के नैतिक जीवन संभव है?

सारांश इस लेख में यह समझाया गया है कि अक्सर समाज नैतिकता को धर्म से जोड़ देता है, लेकिन नैतिक होना केवल धार्मिक होने पर निर्भर नहीं है। नैतिकता का अर्थ सही-गलत में फर्क समझना और ईमानदारी, करुणा, न्याय, जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को अपनाना है। धर्म ने सदियों से इन मूल्यों को सिखाने में भूमिका निभाई है, पर कई बार धार्मिक लोग भी अनैतिक व्यवहार करते हैं—इससे स्पष्ट होता है कि धर्म नैतिकता की गारंटी… Continue reading क्या बिना धर्म के नैतिक जीवन संभव है?

 January 12, 2026

Somnath Temple : जब इतिहास टूटता है, लेकिन आस्था खड़ी रहती है

Somnath Temple : History of Somanth Temple अरब सागर की लहरें आज भी उसी लय में उठती-गिरती हैं, जैसे सदियों पहले उठती थीं। फर्क बस इतना है कि उनके सामने खड़ा सोमनाथ मंदिर अब केवल पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि भारत की सामूहिक स्मृति बन चुका है। यह स्मृति टूटने की नहीं, बार-बार खड़े होने की है। एक मंदिर, अनेक कालखंड सोमनाथ भारत के उन गिने-चुने स्थलों में है, जहाँ पुराण, इतिहास और वर्तमान एक… Continue reading Somnath Temple : जब इतिहास टूटता है, लेकिन आस्था खड़ी रहती है

 January 11, 2026

सोमनाथ 1000 वर्ष महोत्सव: आस्था, स्वाभिमान और राष्ट्र चेतना का ऐतिहासिक संगम

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व – देश के सम्मान का महोत्सव सोमनाथ (गुजरात): भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व ने इतिहास के एक सहस्राब्दी को सजीव कर दिया। यह महोत्सव 1026 ईस्वी में हुए प्रथम आक्रमण के 1000 वर्ष पूर्ण होने तथा स्वतंत्र भारत में मंदिर पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। अरब सागर के तट पर स्थित यह ज्योतिर्लिंग एक… Continue reading सोमनाथ 1000 वर्ष महोत्सव: आस्था, स्वाभिमान और राष्ट्र चेतना का ऐतिहासिक संगम

 January 11, 2026

धर्म और ज्योतिष में मतभेद क्यों हैं?

धर्म और ज्योतिष में मतभेद क्यों हैं? धर्म और ज्योतिष—दोनों ही मानव जीवन को दिशा देने का प्रयास करते हैं, फिर भी इनके बीच अक्सर विरोध और मतभेद देखने को मिलते हैं। कई लोग धर्म को सर्वोपरि मानते हैं, जबकि कुछ ज्योतिष को जीवन का मार्गदर्शक समझते हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि जब उद्देश्य समान है, तो मतभेद क्यों हैं? धर्म की मूल अवधारणा धर्म का आधार ईश्वर, आत्मा, नैतिकता और कर्म पर… Continue reading धर्म और ज्योतिष में मतभेद क्यों हैं?

 January 7, 2026

सकट चौथ व्रत: माताओं का निर्जला संकल्प और पुत्र की लंबी उम्र की कामना

भारतीय संस्कृति में माँ और संतान का रिश्ता केवल रक्त का नहीं, बल्कि आस्था, त्याग और तपस्या से जुड़ा होता है। इसी भावनात्मक और धार्मिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण रूप है सकट चौथ व्रत, जिसे विशेष रूप से माताएँ अपने पुत्र की लंबी उम्र, सुख और संकटों से रक्षा के लिए रखती हैं। यह व्रत न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि मातृत्व की निस्वार्थ भावना को भी दर्शाता है। सकट चौथ को कई… Continue reading सकट चौथ व्रत: माताओं का निर्जला संकल्प और पुत्र की लंबी उम्र की कामना

 January 7, 2026

क्या नया साल आत्मचिंतन का अवसर है?

क्या नया साल आत्मचिंतन का अवसर है? नया साल आते ही लोग जश्न मनाते हैं, शुभकामनाएँ देते हैं और नई शुरुआत की बातें करते हैं। लेकिन क्या नया साल केवल कैलेंडर बदलने का नाम है, या यह आत्मचिंतन और आत्ममूल्यांकन का भी एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है? भारतीय दर्शन और विश्व की कई आध्यात्मिक परंपराएँ नए समय को स्वयं को समझने और सुधारने का क्षण मानती हैं। समय का परिवर्तन और मानव मन समय… Continue reading क्या नया साल आत्मचिंतन का अवसर है?

 January 5, 2026

अलग-अलग धर्मों में वर्ष की शुरुआत कैसे होती है?

अलग-अलग धर्मों में वर्ष की शुरुआत कैसे होती है? जब दुनिया के कई हिस्सों में 1 जनवरी को नया साल मनाया जाता है, तब यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या सभी धर्म वर्ष की शुरुआत एक ही दिन मानते हैं? वास्तव में, अलग-अलग धर्मों में वर्ष की शुरुआत की अवधारणा भिन्न है। यह केवल कैलेंडर का विषय नहीं, बल्कि आस्था, खगोलीय गणना और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। हिंदू धर्म में वर्ष की शुरुआत… Continue reading अलग-अलग धर्मों में वर्ष की शुरुआत कैसे होती है?

 January 5, 2026

आस्था और परंपरा में अंतर क्या है?

आस्था और परंपरा में अंतर क्या है? भारतीय समाज में “आस्था” और “परंपरा” दो ऐसे शब्द हैं जो अक्सर एक-दूसरे के पर्याय समझ लिए जाते हैं। लेकिन वास्तव में दोनों का स्वरूप, उद्देश्य और प्रभाव अलग-अलग है। जब तक इन दोनों के बीच के अंतर को नहीं समझा जाता, तब तक धर्म, संस्कृति और जीवन को लेकर भ्रम बना रहता है। इस लेख में हम सरल भाषा में समझेंगे कि आस्था और परंपरा में वास्तविक… Continue reading आस्था और परंपरा में अंतर क्या है?

 January 4, 2026

क्या नई पीढ़ी धर्म से दूर हो रही है?

क्या नई पीढ़ी धर्म से दूर हो रही है? आज के समय में अक्सर यह कहा जाता है कि नई पीढ़ी धर्म से दूर होती जा रही है। सोशल मीडिया, तकनीक, करियर और आधुनिक जीवनशैली के बीच युवाओं को देखकर यह धारणा बनना स्वाभाविक भी है। लेकिन क्या यह सचमुच धर्म से दूरी है, या फिर धर्म को समझने का तरीका बदल रहा है? इस प्रश्न का उत्तर उतना सरल नहीं जितना दिखता है। धर्म… Continue reading क्या नई पीढ़ी धर्म से दूर हो रही है?

 January 4, 2026

धर्म और आधुनिक जीवन में टकराव क्यों दिखता है?

धर्म और आधुनिक जीवन में टकराव क्यों दिखता है? आज का मनुष्य एक अजीब द्वंद्व में जी रहा है। एक ओर तेज़ी से बदलती तकनीक, आधुनिक सोच, करियर, भौतिक सुख और वैश्विक संस्कृति है, तो दूसरी ओर सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताएँ, परंपराएँ और नैतिक मूल्य। ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि धर्म और आधुनिक जीवन के बीच टकराव क्यों दिखाई देता है? क्या यह टकराव वास्तविक है या केवल हमारी सोच का भ्रम?… Continue reading धर्म और आधुनिक जीवन में टकराव क्यों दिखता है?

 January 4, 2026

पंचांग क्या है और भारतीय संस्कृति में इसका महत्व क्यों है?

पंचांग क्या है और भारतीय संस्कृति में इसका महत्व क्यों है? भारतीय संस्कृति में समय केवल घड़ी या कैलेंडर की गणना नहीं है, बल्कि वह एक आध्यात्मिक व्यवस्था है। इसी समय-गणना की सबसे प्राचीन और सटीक प्रणाली को पंचांग कहा जाता है। पंचांग न केवल तिथि बताता है, बल्कि यह जीवन के हर शुभ-अशुभ कार्य को दिशा देता है। विवाह, पूजा, व्रत, त्योहार, यात्रा या कोई भी नया कार्य — पंचांग के बिना अधूरा माना… Continue reading पंचांग क्या है और भारतीय संस्कृति में इसका महत्व क्यों है?

 January 3, 2026