क्या बिना धर्म के नैतिक जीवन संभव है?
सारांश इस लेख में यह समझाया गया है कि अक्सर समाज नैतिकता को धर्म से जोड़ देता है, लेकिन नैतिक होना केवल धार्मिक होने पर निर्भर नहीं है। नैतिकता का अर्थ सही-गलत में फर्क समझना और ईमानदारी, करुणा, न्याय, जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को अपनाना है। धर्म ने सदियों से इन मूल्यों को सिखाने में भूमिका निभाई है, पर कई बार धार्मिक लोग भी अनैतिक व्यवहार करते हैं—इससे स्पष्ट होता है कि धर्म नैतिकता की गारंटी… Continue reading क्या बिना धर्म के नैतिक जीवन संभव है?





