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ब्रह्माकुमारीज संस्थान के वैश्विक शिखर सम्मेलन में की गई पर्यावरण बचाने की मुहिम 

ब्रह्माकुमारीज संस्थान के वैश्विक शिखर सम्मेलन में की गई पर्यावरण बचाने की मुहिम 

ब्रह्माकुमारीज संस्थान के वैश्विक शिखर सम्मेलन में की गई पर्यावरण बचाने की मुहिम 
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ब्रह्माकुमारीज संस्थान के वैश्विक शिखर सम्मेलन में की गई पर्यावरण बचाने की मुहिम 

ब्रह्माकुमारीज संस्थान के वैश्विक शिखर सम्मेलन में की गई पर्यावरण बचाने की मुहिम 

  • आध्यात्मिक ज्ञान से होगी स्वर्णिम युग की परिकल्पना साकार  
  • उप्र के टिकट और नागरिक विमानन मंत्री नंदगोपाल गुप्ता बोले- सरकार से कहीं ज्यादा ब्रह्माकुमारीज काम कर रही है
  • प्रसिद्ध पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता एवं नवधान्या फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. वंदन शिवा ने पर्यावरण बचाने का किया आह्नान

मानसिक प्रदूषण मिटाना, खेती को जहरमुक्त कर जैविक-यौगिक खेती की ओर रुख और आध्यात्मिक ज्ञान से ही स्वर्णिम युग की परिकल्पना साकार हो सकती है। ये तीन बड़े संदेश वैश्विक शिखर सम्मेलन के तीसरे दिन देश-विदेश से पधारे विषय विशेषज्ञों ने दिए। सोमवार सुबह का सत्र “स्वर्णिम युग के लिए वैश्विक ज्ञान” विषय पर हुआ। बता दें कि ब्रह्माकुमारीज संस्थान के शांतिवन परिसर में चल रहे चार दिवसीय वैश्विक शिखर सम्मेलन में देश-सहित विश्व के 140 देशों से छह हजार से अधिक लोग पहुंचे हैं। इसकी थीम “आध्यात्म, विज्ञान और पर्यावरण” है।  

सम्मेलन में उत्तरप्रदेश सरकार के टिकट और नागरिक विमानन मंत्री नंदगोपाल गुप्ता ने कहा कि किसान खुशहाल होगा तो ही देश खुशहाल हो सकता है। ब्रह्मा बाबा ने इस महान संस्था की स्थापना ही, जिससे जुड़कर लाखों लोग अपना जीवन पावन बना रहे हैं। यहां आकर बहुत पॉजीटिव एनर्जी महसूस कर रहा हूं। यहां वीआईपी से लेकर गरीब लोग अच्छे मन और समर्पण भाव से सेवा कर रहे हैं। ये इस ज्ञान की महानता दर्शाता है। एक सरकार जो काम करती है उससे कहीं ज्यादा ब्रह्माकुमारी संस्था काम कर रही है। हम सभी समर्पित होकर कार्य करें।      

जहर की खेती से 75 फीसदी जीव मर चुके हैं : पर्यावरणविद् डॉ. वंदना शिवा

प्रसिद्ध पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता एवं नवधान्या फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. वंदना शिवा ने कहा कि भारत में पिछले 20 साल में तीन लाख किसानों ने आत्महत्या की है। पर्यावरण के 75 प्रतिशत जीव खत्म हो चुके हैं। हम खेती पोषण के लिए कर रहे हैं यही कारण है कि आज भारत के 50 फीसदी बच्चे कुपोषण से ग्रस्त हैं। इन सभी समस्याओं का एक ही कारण है जहरयुक्त व रासायनिक खेती। 50 फीसदी क्लाइमेट चैंज का कारण भी वायु प्रदूषण, प्लास्टिक और जहरखेती है। मटेरियललिज्म ने इस दुनिया में तबाही मचाई है। वहीं से सभी प्रदूषण और जहर आए हैं।

जहरयुक्त खेती पंजाब में लाई अंधकार

डॉ. शिवा ने कहा कि खेती में हिंसा के दुष्परिणाम हैं जो आज पंजाब की ये स्थिति है। वहां वर्ष 1984 में रासायनिक खेती की शुरुआत हुई। जिसे हरित क्रांति का नाम दिया वह न हरी है, न क्रांति है। वह स्वर्णिम युग नहीं लाई वह एक अंधकारमय दुनिया लाई। पंजाब जो सबसे ज्यादा संपन्न राज्य था लेकिन वहीं सबसे ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की, कैंसर के मरीज हैं। आज पंजाब के 75 फीसदी युवा नशे की गिरफ्त में हैं।  ये सब इसलिए हुआ क्योंकि हमने वाइलेंस के स्टूमेंट को खेती का इस्टूमेंट बना दिया। 

राजयोग से खेती बनेगी अहिंसक

डॉ. शिवा ने कहा कि राजयोग से ही हम वसुधैव कुटुम्बकम बना सकते हैं। ये सृष्टि एक कुटुम्ब है और इसके एक परिवार के हम भाग हैं। राजयोग हमें सिखाता है कि जैसा हम बीज डालेंगे तो वैसा ही बीज उगेगा। जब हम हिंसा का बीज डालेंगे तो वही उगेगा और जब शांति, प्रेम, आनंद, सहयोग, अहिंसा का बीज डालेंगे तो वही उगेगा। स्वर्णिम दुनिया बनाने के लिए हमें जहरमुक्त खेती बनाना होगी। आध्यात्म से जुडऩा होगा। आध्यात्म हमें अंतर्मन से जुड़कर जीना सिखाता है।  जैव विविधता और जैविक खेती के जो बीज हमारे धर्म ने दिए हैं् वही बोना होंगे। सभी को मिलकर प्रयास करना होंगे कि हमारी खेती जहरमुक्त हो। 

50 साल से पर्यावरण संरक्षण में जुटीं हैं डॉ. शिवा

बता दें कि डॉ. वंदना शिव देश-विदेश में पिछले 50 साल से पर्यावरण संरक्षण को लेकर अलख जगा रही हैं। साथ ही आपको कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है। 11 चले चिपको आंदोलन से आपने वालेंटियर के रूप में शुरुआत की थी। इसके अलावा आपकी हाल ही में जैव विविधता और खेती पर एक पुस्तक प्रकाशित हुई है। 

खेत से पहले कृषक के मन में आध्यात्मिकता के बीज बोने होंगे: बीके सरला

संस्थान के कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग की अध्यक्षा महेसाणा की बीके सरला बहन ने कहा कि वर्तमान समय देश की मांग व पुकार पौष्टिक और सात्विक अन्न से पौष्टिक, स्वच्छ और स्वर्णिम बनाएं। विश्व की सभी समस्याओं का हल, हल में समाया है। हमारी प्राचीन कृषि पद्धति को फिर से अपनाकर शुद्ध व सात्विक अन्न देना होगा। सबसे पहले भारत की शान किसान को सशक्त बनाना होगा। आध्यात्मिकता से ही किसान सशक्त बनेंगे। खेत से पहले हमें कृषक के मन में आध्यात्मिकता के बीज बोने होंगे। उसके मन में जो द्वेष, ईष्र्या, नफरत, तेरे-मेरे का जहर भरा हुआ है, जब तक मानसिक प्रदूषण समाप्त नहीं होगा, तब तक हम उत्तम खेती नहीं कर सकते हैं। संस्थान से जुड़कर आज हजारों किसान जैविक-यौगिक खेती कर रहे हैं। इसे लेकर प्रभाग ने किसान सशक्तिकरण अभियान के रूप में प्रोजेक्ट बनाया है। किसानों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देकर ‘शाश्वत जैविक-यौगिक खेतीÓ के प्रति जागृति ला रहे हैं। 

इन वक्ताओं ने भी व्यक्त किए अपने विचार…

– रशिया से पधारीं सेंटपीटर्स बर्ग की स्टेट काउंसलर जज व संवैधानिक अदालत के न्यायाधीश सचिव कुल्शोवा लियूडमिला ने कहा कि माउंट आबू आकर बहुत शांति का अनुभव कर रही हूं। 

– कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान गंगटोक की को-ऑर्डिनेटर प्रियदर्शिनी श्रेष्ठ ने कहा कि आज दुनिया में बेस्ट सबसे बड़ी समस्या है। हिमालय में प्लास्टिक, बैग के बेस्ट का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। हम सभी को मिलकर प्रयास करना होंगे कि पर्यावरण बचाने के लिए प्लास्टिक का उपयोग कम करें। 

– उप्र के पूर्व शिक्षा मंत्री व राष्ट्रीय दिव्यांग सभा के अध्यक्ष अमरजीत सिंह ‘जनसेवकÓ ने कहा कि ब्रह्माकुमारी•ा एक आध्यात्मिक विश्व विद्यालय के साथ मनोवैज्ञानिक विश्व विद्यालय भी है। इस संस्था से जुडऩे के बाद मेरी सोच में भारी बदलाव आया। यहां हमारे हृदय की सफाई होती है। एक दिन आएगा जब पूरे हिंदुस्तान की पार्लियामेंट यहां शिक्षा लेने आएगी। 

– डेनमार्क से पधारीं ब्रह्माकुमारीज की पर्यावरण संरक्षण की डायरेक्टर बीके सोन्जा ओहल्सन ने कहा कि हमारे एक-एक श्रेष्ठ कर्म से स्वर्णिम दुनिया आएगी। इसके लिए सबसे पहले हमें अपनी सोच को बदलना होगा। खुशी जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। सादगीपूर्ण जीवन और राजयोग मेडिटेशन यहां की पहचान है। 

– एकेपी हीलिंग इंडिया की संस्थापक डॉ. अमित कौर पुरी ने कहा कि सबसे बड़ी एनर्जी का सोर्स धरती है। धरती से ही हम सभी को ऊर्जा मिलती है। आज हम सभी को ऊर्जा संरक्षण करने की जरूरत है। 

– आशीर्वचन देते हुए ओम शांति रिट्रीट सेंटर गुरुग्राम की सहायक निदेशिका बीके शुक्ला बहन ने कहा कि आध्यात्मिकता वह गुलाब को फूल है जो बगीचे में खिले हुए अनेकी फूलों की शोभा बढ़ाता है। आध्यात्मिकता हमारी विल पावर को स्ट्रांग करता है। जैसे सूर्य हमें प्रकाश और ऊर्जा देता है, वैसे ही ज्ञानसूर्य परमपिता परमात्मा इस धरा पर अवतरित होकर हमें फिर से अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। 

नेपाल औैर इंडोनेशिया के कलाकारों ने बांधा समां…

बाली इंडोनेशिया और नेपाल के बुटवल से आए कलाकारों ने भारतीय सांस्कृतिक गीतों पर प्रस्तुति देकर सभी का दिल जीत लिया। स्वागत भाषण ओडिया के को-ऑर्डिनेटर बीके नाथूमल ने दिया। संचालन बीके कोलाबा मुंबई की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके गायत्री ने किया। आभार शांतिवन के मुख्य अभियंता बीके भरत ने माना।

शाम के सत्र में विद्वानों के विचार…

– महाराष्ट्र के जल संरक्षण और प्रोटोकॉल मंत्री रामशंकर सिंदे ने कहा कि मुझे जानकर आश्चर्य हुआ कि ये संस्था पर्यावरण संरक्षण से लेकर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, नशा मुक्ति, जैविक-यौगिक खेती आदि क्षेत्रों में कार्य कर रही है। ये बहुत ही सराहनीय कार्य है। साथ ही संस्था द्वारा देश के नामी विश्व विद्यालयों से एमओयू कर मूल्य एवं आध्यात्मिकता की शिक्षा दी जा रही है। 

– अबूधाबी से आए एनएमसी हेल्थकेयर के चेयरमैन व संस्थापक डॉ. बीआर शेट्टी ने कहा कि मैं इस संस्था से पिछले 50 साल से जुड़ा हूं। यहां जो आध्यात्म और मेडिटेशन की शिक्षा दी जा रही है उससे लोगों की जिंदगी बदल रही है। मेडिटेशन से मैंने शांति की अनुभूति की। मेरी जिंदगी आसान हो गई। 

– चंडीगढ़ से पधारे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन ने कहा कि अपने जीवन में शब्दों पर ध्यान दें। हम जो बोलते हैं, सोचते हैं, देखते हैं और जो कर्म करते हैं वैसा ही बन जाते हैं। – नई दिल्ली से आए ट्राई के चेयरमैन रामसेवक शर्मा ने कहा कि यहां जैसा अनुशासन  और व्यवस्था बहुत कम संगठनों में ही मिलती है। संस्था साइंस से लेकर पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य कर रही है। यहां बताया जाता है कि हम घर-गृहस्थ में रहकर परमात्मा से जुड़ सकते हैं। 

इन्होंने भी व्यक्त किए विचार…

नवभारत टाइम्स दिल्ली के मेट्रो एडिटर वीरेन्द्र कुमार, भारत सरकार के कार्पोरेट अफेयर्स के डायरेक्टर जनरल नरेन्द्र कुमार भोला, नेपाल से आए विधायक कृष्णप्रसाद ढाहल, म्यूजिक डायरेक्टर व कंपोसर मुंबई से आए श्रवण कुमार, हैदराबाद लेम्को गु्रप के कुंदल राव ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

Religion World

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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October 1, 2018 8 min read
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