RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में आदि गुरू शंकराचार्य जी की जयंती मनाई गई

ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में आदि गुरू शंकराचार्य जी की जयंती मनाई गई

ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में आदि गुरू शंकराचार्य जी की जयंती मनाई गई
Visual Archive

ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में आदि गुरू शंकराचार्य जी की जयंती मनाई गई

परमार्थ निकेतन में आदि गुरू शंकराचार्य जी की जयंती मनाई गई

  • परमार्थ निकेतन में सनातन धर्म के ज्योर्तिधर और वेदान्त के प्रणेता आदि गुरू शंकराचार्य जी की जयंती मनाई
  • वेद मंत्रों से किया पूजन कोरोना से मुक्त विश्व हेतु प्रार्थना
  • कोरोना वायरस से मुक्ति के लिये विशेष हवन और जप
  • भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त महाकवि पूज्य संत श्री सूरदास जी की जयंती किया नमन
  • कोरोना वायरस से मुक्ति के लिये सोशल डिसटेंसिंग और लाॅकडाउन है रामबाण औषधि-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश, 28 अप्रैल। परमार्थ निकेतन में हिन्दू धर्म की सर्वोच्च पीठ के जगद्गुरू, सनातन धर्म के ज्योर्तिधर भारत की महान विभूति आदिगुरू शंकराचार्य जी की जयंती के अवसर पर सोशल डिसटेंसिंग का पालन करते हुये सभी संतों ने वेद मंत्रों से शंकराचार्य जी का पूजन किया। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने लाॅकडाउन के पहले से परमार्थ निकेतन में निवास कर रहे भारत सहित विश्व के कई देशों के पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अद्वैत परम्परा, सनातन धर्म और भारत के चार क्षेत्रों में स्थापित चार पीठों की गौरवमयी परम्परा और आध्यात्मिक महत्व के विषय में जानकारी प्रदान की।

प्रातःकाल 6 बजे आदिगुरू शंकराचार्य जी का अभिषेक, हवन, विशेष पूजन और विश्व शान्ति से कोरोना से मुक्ति के लिये विशेष मंत्रों से जप किया गया। स्वामी जी ने कहा कि वर्तमान समय में पूरा विश्व कोरोना वायरस की चपेट में है, भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने ’’दो गज दूरी जो है जरूरी’’ का मंत्र दिया है, उसका हम सभी देशवासियों को गंभीरता से पालन करना चाहिये क्योंकि इस वायरस से मुक्ति कि लिये सोशल डिसटेंसिंग ही रामबाण औषधि है। रामबाण से तात्पर्य 100 प्रतिशत सफलता प्रदान करने वाला प्रयोग। व्यक्ति जब अस्वस्थ होता है और जब सब चीजे फेल हो जाती है तब रामबाण औषधि ही काम करती है। लाॅकडाउन ही लक्ष्मण रेखा है, इस लाॅकडाउन की लक्ष्मण रेखा को मत लांघिये इसका पालन निष्ठा के साथ करे यह देश की अद्भुत तरीके से सेवा करने का एक अवसर है। कई बार सीमा पर जाकर लड़ाई नहीं लड़ी जाती बल्कि अपने घर के दरवाजे की सीमा रेखा न लांघना ही कोरोना पर विजय प्राप्त करना है इसलिये अपने घर में रहें और सुरक्षित रहें।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने पूरे विश्व को और सनातन संस्कृति को अद्वैत का पारस पत्थर दिया जिसको छू कर सब कंचन बन जायें। इस पारस को छू कर जितने भी वाद-विवाद हैं सब समाप्त हो सकते है। अद्वैत ऐसा मंत्र है जो भारत ही नहीं पूरे विश्व को एक नई दिशा दे सकता हैं। उन्होेंने युवाओं से आह्वान किया कि पूज्य शंकराचार्य जी के जीवन को, उनके चरित्र को और उनके विचारों को जाने और समझें उन गुणों को आत्मसात करें।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने आदि गुरू शंकराचार्य जी द्वारा स्थापित ज्योतिर्मठ, श्रंगेरी शारदा पीठ, द्वारिका पीठ, गोवर्धन पीठ के विषय में जानकारी देते हुये भारतीय हिन्दू दर्शन के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डाला। स्वामी जी ने कहा कि सेवा, साधना और साहित्य का अद्भुत संगम है यह परम्परा। आदि गुरू शंकराचार्य जी ने छोटी सी उम्र में भारत का भ्रमण कर हिन्दू समाज को एक सूत्र में पिरोने हेतु चार पीठों की स्थापना की। कश्मीर से कन्याकुमारी तक, दक्षिण से उत्तर तक, पूर्व से पश्चिम तक पूरे भारत का भ्रमण कर एकता का संदेश दिया। उन्होने कहा कि एकरूपता हमारे भोजन में, हमारी पोशाक में भले ही न हो परन्तु हमारे बीच एकता जरूर हो; एकरूपता हमारे भावों में हो, विचारों में हो ताकि हम सभी मिलकर रहें। किसी को छोटा, किसी को बड़ा न समझें, किसी को ऊँच और किसी को नीच न समझें ’’मानव मानव एक समान। सबके भीतर है भगवान। इस तरह की सारी दीवारों को तोड़ने के लिये तथा छोटी छोटी दरारों को भरने के लिये ही आदिगुरू शंकराचार्य जी ने पैदल यात्रा की। शंकराचार्य जी ने ब्रह्म वाक्य ’’ब्रह्म ही सत्य है और जगत माया’’ दिया। साथ ही सुप्रसिद्ध ग्रंथ ’ब्रह्मसूत्र’ का भाष्य किया, ग्यारह उपनिषदों तथा गीता पर भाष्य किया।

शंकराचार्य जी ने वैदिक धर्म और दर्शन को पुनः प्रतिष्ठित करने हेतु अथक प्रयास किये। उन्होने तमाम विविधताओं से युक्त भारत को एक करने में अहम भूमिका निभायी। संस्कृत में संवाद कर उन्होने संस्कृत भाषा को समाज के सभी वर्गों से जोड़ा। आदिगुरू शंकराचार्य जी ने मठों और अखाड़ोें की स्थापना कर संन्यासियों और साधुओं को उनकी बौद्धिक, शारीरिक और यौगिक शक्ति से हिन्दू धर्म की रक्षा का जिम्मा सौंपा।

आदिगुरू शंकराचार्य जी को अद्वैत वेदान्त के सूत्र ’’अहं ब्रह्मास्मि’’ विचारधारा को, इस अवधारणा को पूरे विश्व में सम्मान मिला है क्योंकि अब समय आ गया है व्यक्ति इस अद्वैत के पारस स्पर्शी मंत्र के महत्व को समझें जिसके छूने से कोई भेदभाव नहीं रहता सब पारस सा बन जाता है। अद्वैत के मर्म को समझने के बाद व्यक्ति में कहाँ ऊँच कहाँ नीच, कहाँ छोटा कहाँ बड़ा ये सारी दीवारें गिर जाती हैं इसलिये 21 वीं सदी में ही नहीं बल्कि आने वाली हर सदी में इस विचार की आवश्यकता रहेगी इसलिये आज का दिन महत्वपूर्ण है। आज का दिन इसलिये भी महत्वपूर्ण है चाहे बात एकता की हो या एकरूपता की हो या परमात्म सत्ता से एकता की बात हो उन सब के लिये यह महत्वपूर्ण है। उनका सिद्धान्त आत्मा और परमात्मा की एकरूपता पर आधारित है। ’’अहं ब्रह्मास्मि’’ अर्थात मैं ही ब्रह्म हूँ और सर्वत्र हूँ इस प्रकार प्रकृति की रक्षा का संदेश दिया। ऐसे परम तपस्वी, वीतराग, परिव्राजक, श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ सनातन धर्म के मूर्धन्य को प्रणाम करते हुये आईये हम उन्हें अपनी पुष्पांजलि अर्पित करें ताकि सदियों तक उनका मार्गदर्शन पूरे विश्व को मिलता रहे।

साथ ही 16 अप्रैल को पालघर में दो संतों की हुई निर्मम हत्या को दुखद बताते हुये संतों की आत्मा की शान्ति के लिये मौन रख कर श्रद्धाजंलि अर्पित की।

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

April 28, 2020 5 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

भोजशाला मंदिर क्या है? जानिए किस देवी को समर्पित है वाग्देवी भोजशाला, जिस पर हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में भोजशाला परिसर से जुड़े…

Read now
Hinduism

लोहड़ी में आग की पूजा क्यों होती है? इसका धार्मिक कारण क्या है?

भूमिका भारत में त्योहार केवल उत्सव नहीं होते, बल्कि वे जीवन और प्रकृति के गहरे संबंध को दर्शाते हैं। लोहड़ी उत्तर भारत का एक प्रमुख लोकपर्व है, जो…

Read now
Astrology

ज्योतिष, भविष्यवाणी और धर्म — संबंध या टकराव?

ज्योतिष, भविष्यवाणी और धर्म — संबंध या टकराव? मानव इतिहास की शुरुआत से ही मनुष्य ने आकाश, समय और अपने भविष्य को समझने की अदृश्य इच्छा को हमेशा…

Read now