अलग-अलग धर्मों में वर्ष की शुरुआत कैसे होती है?
जब दुनिया के कई हिस्सों में 1 जनवरी को नया साल मनाया जाता है, तब यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या सभी धर्म वर्ष की शुरुआत एक ही दिन मानते हैं? वास्तव में, अलग-अलग धर्मों में वर्ष की शुरुआत की अवधारणा भिन्न है। यह केवल कैलेंडर का विषय नहीं, बल्कि आस्था, खगोलीय गणना और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है।
हिंदू धर्म में वर्ष की शुरुआत
हिंदू धर्म में वर्ष की शुरुआत एक नहीं, बल्कि विविध परंपराओं के अनुसार होती है। अधिकांश हिंदू पंचांग चंद्र या चंद्र-सौर गणना पर आधारित हैं।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को उत्तर भारत और कई अन्य क्षेत्रों में हिंदू नववर्ष माना जाता है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में इसे गुड़ी पड़वा, आंध्र और तेलंगाना में उगादी, तथा कश्मीर में नवरेह कहा जाता है।
तमिल परंपरा में पुथांडु (अप्रैल) से नया वर्ष शुरू होता है।
हिंदू नववर्ष का संबंध प्रकृति, ऋतु परिवर्तन और कृषि चक्र से जुड़ा हुआ है।
इस्लाम धर्म में वर्ष की शुरुआत
इस्लाम में वर्ष की शुरुआत हिजरी कैलेंडर से होती है, जो पूर्णतः चंद्र कैलेंडर है।
इस्लामी नववर्ष मुहर्रम माह की पहली तारीख से शुरू होता है।
हिजरी वर्ष की शुरुआत पैगंबर मुहम्मद ﷺ के हिजरत (मक्का से मदीना की यात्रा) से जुड़ी है।
इस्लाम में नया साल उत्सव की बजाय आत्मचिंतन और इतिहास स्मरण का समय माना जाता है।
ईसाई धर्म में वर्ष की शुरुआत
ईसाई परंपरा में प्रचलित कैलेंडर ग्रेगोरियन कैलेंडर है।
इसमें 1 जनवरी को नया वर्ष शुरू होता है।
यह कैलेंडर रोमन और बाद में पोप ग्रेगरी XIII द्वारा संशोधित प्रणाली पर आधारित है।
धार्मिक दृष्टि से ईसाई चर्च में एडवेंट काल को आध्यात्मिक वर्ष की शुरुआत माना जाता है, जो दिसंबर में आता है।
यहूदी धर्म में वर्ष की शुरुआत
यहूदी धर्म में नया वर्ष रोश हशाना कहलाता है।
यह आमतौर पर सितंबर-अक्टूबर में मनाया जाता है।
यह यहूदी चंद्र-सौर कैलेंडर पर आधारित होता है।
रोश हशाना आत्ममंथन, पश्चाताप और ईश्वर से नए आरंभ की प्रार्थना का पर्व है।
बौद्ध धर्म में वर्ष की शुरुआत
बौद्ध धर्म में वर्ष की शुरुआत क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार बदलती है।
श्रीलंका, थाईलैंड और म्यांमार में वैसाख के आसपास नया वर्ष मनाया जाता है।
यह बुद्ध के जन्म, ज्ञान और महापरिनिर्वाण से जुड़ा हुआ है।
यह समय शांति, ध्यान और नैतिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।
सिख धर्म में वर्ष की शुरुआत
सिख धर्म में धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण वर्ष नानकशाही कैलेंडर पर आधारित है।
इसका आरंभ गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व से जुड़ा है, जो नवंबर में आता है।
हालांकि, सामाजिक रूप से सिख समुदाय भी 1 जनवरी का नया साल मानता है।
पारसी (जरथुस्ती) धर्म में वर्ष की शुरुआत
पारसी समुदाय में नया साल नवरोज़ कहलाता है।
यह वसंत विषुव (मार्च) के आसपास मनाया जाता है।
नवरोज़ प्रकृति के नवजीवन और प्रकाश की विजय का प्रतीक है।
अलग-अलग धर्मों में वर्ष की शुरुआत की तिथियाँ भिन्न हैं, लेकिन उनका उद्देश्य एक ही है— नया आरंभ, आत्मचिंतन और जीवन में संतुलन। यह विविधता दर्शाती है कि समय को देखने का दृष्टिकोण हर संस्कृति में अलग है, लेकिन मानव भावनाएँ और आशाएँ समान हैं।
~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो









