हिजरी कैलेंडर क्या है और यह क्यों खास है?
दुनिया में समय को मापने के कई तरीके हैं, लेकिन हर कैलेंडर केवल तारीखों का हिसाब नहीं होता, बल्कि वह किसी न किसी सभ्यता, आस्था और इतिहास से जुड़ा होता है। इस्लाम धर्म में जिस कैलेंडर का उपयोग किया जाता है, उसे हिजरी कैलेंडर कहा जाता है। यह कैलेंडर न केवल समय बताता है, बल्कि मुस्लिम समुदाय की धार्मिक पहचान और आध्यात्मिक जीवन से भी गहराई से जुड़ा है। तो आइए जानते हैं कि हिजरी कैलेंडर क्या है और यह क्यों खास माना जाता है।
हिजरी कैलेंडर का अर्थ और शुरुआत
“हिजरी” शब्द अरबी भाषा के “हिजरत” से निकला है, जिसका अर्थ होता है—स्थान परिवर्तन या पलायन। हिजरी कैलेंडर की शुरुआत उस ऐतिहासिक घटना से मानी जाती है जब पैगंबर मुहम्मद साहब ने सन् 622 ईस्वी में मक्का से मदीना की हिजरत की थी।
यह घटना इस्लाम के इतिहास में एक नया मोड़ थी, क्योंकि इसके बाद मुस्लिम समाज को स्वतंत्र पहचान, सामाजिक व्यवस्था और धार्मिक संरचना मिली। इसी कारण हिजरी कैलेंडर की गिनती हिजरत के वर्ष से शुरू होती है, न कि किसी राजा या साम्राज्य के शासन से।
हिजरी कैलेंडर किस पर आधारित है?
हिजरी कैलेंडर पूरी तरह चंद्रमा पर आधारित होता है। इसमें:
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एक वर्ष में 12 महीने होते हैं
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हर महीना 29 या 30 दिनों का होता है
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नया महीना चांद दिखने से शुरू होता है
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कुल वर्ष लगभग 354 या 355 दिनों का होता है
चूंकि यह सूर्य वर्ष से लगभग 10–11 दिन छोटा होता है, इसलिए हिजरी महीनों की तिथियां हर साल आगे खिसकती रहती हैं।
हिजरी कैलेंडर के 12 महीने
हिजरी कैलेंडर में कुल बारह महीने होते हैं:
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मुहर्रम
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सफर
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रबी-उल-अव्वल
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रबी-उस-सानी
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जमाद-उल-अव्वल
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जमाद-उस-सानी
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रजब
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शाबान
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रमज़ान
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शव्वाल
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ज़िल-क़ादा
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ज़िल-हिज्जा
इनमें रमज़ान, ज़िल-हिज्जा और मुहर्रम का धार्मिक महत्व सबसे अधिक माना जाता है।
हिजरी कैलेंडर क्यों खास है?
हिजरी कैलेंडर की खासियत केवल उसकी गणना-पद्धति नहीं, बल्कि उसका आध्यात्मिक उद्देश्य है।
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रमज़ान का रोज़ा आत्मसंयम सिखाता है
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ईद-उल-फितर और ईद-उल-अज़हा सामाजिक समानता का संदेश देती हैं
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हज यात्रा ज़िल-हिज्जा में होती है
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मुहर्रम का महीना आत्मचिंतन और इतिहास की याद दिलाता है
यह कैलेंडर मुसलमानों को सांसारिक समय से अधिक ईश्वरीय समय से जोड़ता है।
चांद देखने की परंपरा का महत्व
हिजरी कैलेंडर में चांद देखने की परंपरा आज भी जीवित है। यह परंपरा यह सिखाती है कि समय की गणना केवल गणित नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ तालमेल भी है।
यही कारण है कि अलग-अलग देशों में कभी-कभी एक ही त्योहार अलग दिन मनाया जाता है।
आधुनिक दौर में हिजरी कैलेंडर की भूमिका
आज भले ही सरकारी और व्यावसायिक कामों में ग्रेगोरियन कैलेंडर का उपयोग होता हो, लेकिन मुस्लिम समाज में धार्मिक जीवन पूरी तरह हिजरी कैलेंडर पर आधारित है।
नमाज़, रोज़ा, हज, ज़कात और त्योहार—all कुछ इसी कैलेंडर से तय होते हैं।
हिजरी कैलेंडर केवल एक कैलेंडर नहीं, बल्कि इस्लामी इतिहास, आस्था और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है।
यह हमें याद दिलाता है कि समय केवल गुजरने का नाम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, त्याग और ईश्वर से जुड़ने का अवसर भी है। यही कारण है कि हिजरी कैलेंडर आज भी उतना ही खास है, जितना सदियों पहले था।
~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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