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क्या है विक्रम संवत और नव संवत्सर

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क्या है विक्रम संवत और नव संवत्सर

क्या है विक्रम संवत और नव संवत्सर

विक्रम संवत को नव संवत्सर भी कहा जाता है. संवत्सर पांच तरह का होता है जिसमें सौर, चंद्र, नक्षत्र, सावन और अधिमास आते हैं.

विक्रम संवत में यह सब शामिल रहते हैं. हालांकि विक्रमी संवत के उद्भव को लेकर विद्वान एकमत नहीं हैं लेकिन अधितर 57 ईसवीं पूर्व ही इसकी शुरुआत मानते हैं.

सौर वर्ष के महीने 12 राशियों के नाम पर हैं इसका आरंभ मेष राशि में सूर्य की संक्राति से होता है. यह 365 दिनों का होता है.वहीं चंद्र वर्ष के मास चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़ आदि हैं इन महीनों का नाम नक्षत्रों के आधार पर रखा गया है. चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है इसी कारण जो बढ़े हुए दस दिन होते हैं वे चंद्रमास ही माने जाते हैं लेकिन दिन बढ़ने के कारण इन्हें अधिमास कहा जाता है. नक्षत्रों की संख्या 27 है इस प्रकार एक नक्षत्र मास भी 27 दिन का ही माना जाता है. वहीं सावन वर्ष की अवधि लगभग 360 दिन की होती है. इसमें हर महीना 30 दिन का होता है.

यह भी पढ़ें-क्या, क्यों और कैसा रहेगा विक्रम सम्वत 2075 हम सभी के लिए

नव संवत्सर 2075 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा , 18 मार्च 2018 से प्रारंभ हो रहा है. यही हिन्दुओं का नया वर्ष है.हमारे सनातन धर्म की मान्यता अनुसार इस महीने की 18 तरीक से हिन्दू नववर्ष प्रारंभ होगा. इस बार इस नववर्ष का नाम है विरोधीकृत संवत्सर.

ग्रंथो में लिखा है कि जिस दिन सृष्टि का चक्र प्रथम बार विधाता ने प्रवर्तित किया, उस दिन चैत्र शुदी 1 रविवार था. हमारे लिए आने वाला संवत्सर 2075 बहुत ही भाग्यशाली होगा , क़्योंकि इस वर्ष भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रविवार है, शुदी एवम ‘शुक्ल पक्ष एक ही है| इसके राजा सूर्य देव होंगे और शनिदेव महामंत्री रहेंगे. 18 मार्च 2018 से विक्रम संवत् 2075 आरंभ होगा.

इस वर्ष चैत्र माह में कई व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे.

मेघेश शुक्र एवं धनेश चंद्र होंगे. 18 मार्च से चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ होगा इसके बाद चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को रामनवमी है .

पंडित दयानन्द शास्त्री,
(ज्योतिष-वास्तु सलाहकार)
vastushastri08@gmail.com;

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March 18, 2018 3 min read
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