नदियों की देखरेख के लिए उत्तराखण्ड सरकार ने बनाई वेबसाइट और मोबाइल एप, स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने किया शुभारम्भ

- उत्तराखण्ड राज्य के जलस्रोतों की दशा और दिशा तथा विज्ञान शिक्षण के नवीन आयामों पर हुई चर्चा
- उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान और प्रोद्योगिकी सम्मेलन में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने दीप प्रज्वलित कर किया उद्घाटन
- रिस्पना, कोसी, नैनी पर यूसर्क निर्मित वेबसाइट तथा मोबाइल ऐप का किया शुभारम्भ
- उत्तराखण्ड राज्य के जलस्रोतों से सम्बंधित पुस्तक का किया लोकार्पण
- भारत में भूजल पर गंभीर खतरा, नदियों को बचाना होगा – स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 23 फरवरी। ग्राफिक एरा डीम्ड विश्वविद्यालय, देहरादून में आयोजित उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान और प्रोद्योगिकी सम्मेलन में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता एवं ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने मुख्य अतिथि एवं प्रमुख वक्ता के रूप में सहभाग किया। इस सम्मेलन में उत्तराखण्ड राज्य के जलस्रोतों की दशा और दिशा तथा विज्ञान शिक्षण के नवीन आयामों पर चर्चा हुई।

इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, स्टुअर्ट डेविड अमेरिकन एम्बेसी के प्रतिनिधि, श्री महन्तेश जी, संस्थापक समर्थनम, प्रो कमल घनशाला, कुलाधिपति, ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय, प्रो दुर्गेश पंत निदेशक, यूसर्क एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस कार्यक्रम में देश की महिला वैज्ञानिकों एवं विश्व दृष्टि बाधितार्थ क्रिकेट टीम के अध्यक्ष एवं सचिव श्री शेलेन्द्र जी को सम्मानित किया गया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने उत्तराखण्ड राज्य के जलस्रोतों की दशा और दिशा को उजागर करने वाली पुस्तक का लोकार्पण किया। इस अवसर पर रिस्पना, कोसी, नैनी पर यूसर्क निर्मित वेबसाइट तथा मोबाइल ऐप का शुभारम्भ किया गया। इस ऐप के विषय में विस्तृत जानकारी प्रो दुर्गेश पंत निदेशक, यूसर्क ने प्रदान की।

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महराज ने कहा, ’जल समस्या व्यक्तिगत नहीं बल्कि वैश्विक समस्या है अतः समाधान भी वैश्विक स्तर पर होने चाहिये। उन्होने कहा कि जल वैज्ञानिक यह घोषणा कर रहे है कि भारत में 2030 तक भूजल स्तर वर्तमान समय से आधा हो जायेगा और 2040 तक विश्व का भूजल स्तर भी तीव्र वेग से कम होता जायेगा इसलिये हमें प्रयास भी क्रान्ति के रूप में करने चाहिये। जल के बिना सृष्टि पर किसी भी जीव के जीवन की कल्पना करना असंभव है। वर्तमान समय में जीवन आधारित आवश्यकतायें स्वच्छ जल और शुद्ध वायु दोनों समस्याओं का हल वृक्षारोपण में निहित है। जब तक पर्याप्त मात्रा में पृथ्वी पर वृक्ष मौजूद थे दोनों समस्यायें भी नही थी जब से वृक्षों को काटकर कंक्रीट के जगंल खड़े हुये समस्यायें भी बढ़ती गयी। स्वामी जी ने देश के युवाओं से आह्वान किया कि वे पर्यावरण एवं जल संरक्षण के लिये आगे आये।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रो एल एम एस, पालनी, कुलपति ग्राफिक एरा डीम्ड विश्वविद्यालय ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया एवं संस्था की ओर से सभी विशिष्ट अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किये गये। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि उपस्थित सभी अतिथियों एवं छात्रों को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प कराया।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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