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सोमनाथ मंदिर में 75 वर्षों बाद हुआ दिव्य कुंभाभिषेक, 11 पवित्र नदियों के जल से हुआ महाअभिषेक

सोमनाथ मंदिर में 75 वर्षों बाद हुआ दिव्य कुंभाभिषेक, 11 पवित्र नदियों के जल से हुआ महाअभिषेक

सोमनाथ मंदिर में 75 वर्षों बाद हुआ दिव्य कुंभाभिषेक, 11 पवित्र नदियों के जल से हुआ महाअभिषेक
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सोमनाथ मंदिर में 75 वर्षों बाद हुआ दिव्य कुंभाभिषेक, 11 पवित्र नदियों के जल से हुआ महाअभिषेक

भारत के सबसे प्राचीन और पवित्र शिव मंदिरों में शामिल सोमनाथ मंदिर एक बार फिर ऐतिहासिक और आध्यात्मिक कारणों से चर्चा में है। गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित इस ज्योतिर्लिंग मंदिर में लगभग 75 वर्षों बाद भव्य कुंभाभिषेक समारोह आयोजित किया गया, जिसने करोड़ों शिव भक्तों को भावुक और उत्साहित कर दिया।

इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान में देश की 11 पवित्र नदियों के जल से भगवान सोमनाथ का अभिषेक किया गया। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रों, शंखध्वनि और हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।


🛕 क्या होता है कुंभाभिषेक?

हिंदू मंदिर परंपरा में कुंभाभिषेक एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दुर्लभ धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है। यह समारोह मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा को पुनर्जीवित करने और देवता की दिव्यता को जागृत रखने के लिए किया जाता है।

इस दौरान मंदिर के शिखर, कलश और गर्भगृह का विशेष वैदिक विधि से अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि इससे मंदिर की शक्ति और पवित्रता कई गुना बढ़ जाती है।


🌊 11 पवित्र नदियों के जल से अभिषेक

इस ऐतिहासिक अनुष्ठान की सबसे खास बात रही कि भगवान सोमनाथ का अभिषेक देश की 11 पवित्र नदियों के जल से किया गया। इनमें गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, कावेरी, सरस्वती सहित कई पवित्र नदियों का जल शामिल था।

धार्मिक मान्यता के अनुसार इन नदियों का जल अत्यंत पवित्र माना जाता है और इनसे किया गया अभिषेक विशेष पुण्यदायी होता है।


🔱 सोमनाथ मंदिर का गौरवशाली इतिहास

सोमनाथ मंदिर केवल एक मंदिर नहीं बल्कि सनातन संस्कृति की आस्था, संघर्ष और पुनर्जागरण का प्रतीक है।

मान्यता है कि यह मंदिर स्वयं चंद्रदेव ने भगवान शिव की आराधना के लिए बनवाया था। इतिहास में इस मंदिर को कई बार विदेशी आक्रमणकारियों ने तोड़ा, लेकिन हर बार यह मंदिर पहले से अधिक भव्य रूप में पुनर्निर्मित हुआ। (britannica.com)

भारत की आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया और 1951 में इसका उद्घाटन हुआ।


✨ कुंभाभिषेक क्यों माना जाता है इतना खास?

धर्म शास्त्रों के अनुसार किसी बड़े मंदिर में कुंभाभिषेक कई दशकों में एक बार ही किया जाता है। यह केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि मंदिर की “प्राण प्रतिष्ठा ऊर्जा” को पुनः जागृत करने की प्रक्रिया मानी जाती है।

सोमनाथ मंदिर में 75 वर्षों बाद हुआ यह आयोजन इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह नई पीढ़ी के लिए सनातन परंपरा और वैदिक संस्कृति का जीवंत अनुभव बन गया।


🙏 लाखों भक्तों ने देखी दिव्यता

इस भव्य आयोजन में देशभर से संत, विद्वान और हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। मंदिर को फूलों और दीपों से सजाया गया था और पूरे परिसर में वैदिक मंत्रों की गूंज सुनाई दे रही थी।

कई भक्तों ने इसे “जीवन का दुर्लभ आध्यात्मिक अनुभव” बताया। सोशल मीडिया पर भी इस आयोजन की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हुए।


🌟 निष्कर्ष

सोमनाथ मंदिर में हुआ यह कुंभाभिषेक केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था…
यह सनातन संस्कृति की जीवंत शक्ति, श्रद्धा और हजारों वर्षों पुरानी परंपराओं का भव्य उत्सव था।

11 पवित्र नदियों के जल से हुआ यह अभिषेक आज भी भक्तों के मन में भक्ति और आस्था की नई ऊर्जा भर रहा है।

🙏 हर हर महादेव

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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May 11, 2026 3 min read
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