संस्कृति विद्वत कुम्भ का शुभारम्भ : चिंतन परम्परा का आगाज – कुम्भ के वास्तविक स्वरूप का दर्शन
- संगम के तट पर अनूठा संगम
- संस्कृति विद्वत कुम्भ का शुभारम्भ
- ’’चिंतन परम्परा का आगाज – कुम्भ के वास्तविक स्वरूप का दर्शन’’
- संस्कार भारती, परमार्थ निकेतन और संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित
- पूज्य संत, कला, साहित्य एवं सिनेमा जगत के विद्वानों की तीन दिवसीय संगोष्ठी
- संस्कृत विद्वत कुम्भ का उद्घाटन पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरीनाथ त्रिपाठी जी, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, मध्यप्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान जी, कला ऋषि बाबा योगेन्द्र जी, डाॅ साध्वी भगवती सरस्वती जी, फिल्म निर्देशक श्री मधुर भंडारकर, श्रीमती मालिनी अवस्थी जी, प्रसिद्ध पाशर्व गायिका श्रीमती हेमलता जी, श्रीमती कल्पना जी, श्री अमीरचन्द्र जी एवं अन्य विशिष्ट अतिथिों ने दीप प्रज्जवलित कर किया
- तीन दिवसीय इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले मूधन्र्य अपने विचार व्यक्त करेंगे यथा आध्यात्मिक गुरू स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, स्वामी श्री अवधेशानन्द जी महाराज, पंडित हरिप्रसाद चैरसिया, बाँसुरी वादक, डाॅ साध्वी भगवती सरस्वती जी, गायक श्री रूपकुमार राठौर, नाटककार, शेखर सेन, लेखक एवं पत्रकार अनंत विजय, श्रीमती मालिनी अवस्थी, फिल्म निर्देशक डाॅ चन्द्रप्रकाश द्विवेदी, फिल्म निर्देशक श्री मधुर भंडारकर, फिल्म निर्देशक श्री सुभाष घई, राजनेता श्री मनोज तिवारी, पत्रकार रोहित सरदाना, पत्रकार श्रीमती शेफाली वैद्य, पत्रकार श्वेता सिंह, धु्रपद गायक वसीफुद्दीन डागर, डाॅ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी जी, श्री राजेश्वर आचार्य जी, श्री चितरंजन ज्योतिषी जी, श्री शेखर सेन, हेमलता वाली, यतीन्द्र मिश्र जी, श्री विनोद अनुपम जी, श्री कमलेश पाण्डेय जी कर रहे है सहभाग
- भारत, बाजार नहीं बल्कि परिवार है
- भारत को ’’क्रिएटिव इंडिया, इनोवेटिव इंडिया’’ बनाना है –
- इन्डिया को तंग दिल नहीं बल्कि यंग दिल इन्डिया बनाना-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
- मन को विकृतियों से मुक्त करना ही कुम्भ- श्री केशरीनाथ त्रिपाठी
प्रयागराज/ऋषिकेश, 12 फरवरी। परमार्थ निकेतन शिविर, अरैल क्षेत्र सेक्टर 18 में में तीन दिवसीय संस्कृति विद्वत कुम्भ का शुभारम्भ हुआ। संस्कृत विद्वत कुम्भ का उद्घाटन पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरीनाथ त्रिपाठी जी, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, कला ऋषि बाबा योगेन्द्र जी, मध्यप्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान जी, डाॅ साध्वी भगवती सरस्वती जी, श्री मधुर भण्डारकर जी, संगीत जगत से श्रीमती मालिनी अवस्थी जी, प्रसिद्ध गायिका श्रीमती हेमलता जी, श्रीमती कल्पना जी, श्री अमीरचन्द्र जी ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।


’’संस्कृति विद्वत कुम्भ’’ के माध्यम से कुम्भ के वास्तविक स्वरूप का दर्शन, कुम्भ का दार्शनिक स्वरूप, जमीन छोड़ती परम्पराएँ, भारत की संवाद एवं चिंतन परम्परा, मीडिया की नैतिक जिम्मेदारी, सिनेमा और समाज, नारी विमर्श का बदलता स्वरूप, कला परम्पराओं की सामाजिक जिम्मेदारी, साहित्य का राष्ट्रधर्म जैसे अनेक विषयों पर विचार विमर्श किया जा रहा है।
आज के उद्घाटन सत्र का शुभारम्भ अतिथियों का स्वागत, दीप प्रज्जलन, संस्कार भारती ध्येय गीत के साथ हुआ तथा समापन ’वन्दे मातरम्’ की गूंज के साथ किया।

संस्कृति विद्वत कुम्भ में देश के विभिन्न क्षेत्रों के मूर्धन्य विद्वान एक मंच पर आकर समाज में व्याप्त समस्याओं पर चितंन और समाधान हेतु इन विषयों पर अपने-अपने विचार व्यक्त करेंगे। यह विचार मंच हमें विभिन्न मूर्धन्यों द्वारा किया गया चितंन और मंथन देगा। कुम्भ की धरती से यह संदेश हम पूरी दुनिया तक पहुंचा सकते है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’’भारत, बाजार नहीं बल्कि परिवार है और यही भारतीय संस्कृति का आधार है। संस्कृति विद्वत कुम्भ’’ संत, शासन, प्रशासन और साहित्यकारों का संगम है ताकि संगम के तट से राष्ट्र को एक दिशा मिल सके जिससे इस देश का संगम बना रहे तीन दिन उसी पर चिंतन होगा। संगम से जो यात्रा निकलेगी वह सबके साथ और सबके विकास की होगी जिससे हमारा राष्ट्र समृद्ध होगा। उन्होने कहा कि हम सभी अपने व्यापार, व्यवहार और परिवार के साथ-साथ राष्ट्र भक्ति करे। आज भारत में श्रेष्ठ चरित्र निर्माण करने की आवश्यकता है, देव भक्ति के साथ देश भक्ति दिलों में जगाने की जरूरत है। स्वामी जी महाराज ने विद्वत कुम्भ के मंत्र से युवाओं को आह्वान करते हुये कहा कि भारत को ’’क्रिएटिव इंडिया, इनोवेटिव इंडिया’’ बनाना है इसके लिये सभी को एकजूट होने की जरूरत है। भारत के पास अपार बौद्धिक संपदा है बस इसका उपयोग सही दिशा में करना होगा यही संदेश आज इस मंच से लेकर जाये।

संस्कृति विद्वत कुम्भ में आये सभी विद्वानों ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के पावन सान्निध्य में होने वाली दिव्य संगम आरती में सहभाग किया। स्वामी जी महाराज ने एक दिव्य परम्परा शुरू की ’देवभक्ति से पहले देश भक्ति’। इसी क्रम मंे प्रतिदिन संगम आरती के पश्चात राष्ट्रगान होता है और भारत माता की जय से पूरा अरैल क्षेत्र गूंज जाता है। स्वामी जी महाराज ने कहा कि प्रयाग की धरती पर दिव्य कुम्भ-भव्य कुम्भ, स्वच्छ और सुरक्षित कुम्भ के रूप से सम्पन्न होने वाला कुम्भ है। उसी प्रकार इस विचार कुम्भ के माध्यम से विचारों की स्वच्छता और विचारों में सात्विकता हो यही संदेश लेकर जाये।
सभी विशिष्ट अतिथियों ने विश्व शान्ति हेतु प्रतिदिन किये जा रहे हवन में विश्व कल्याण की प्रार्थना के साथ आहूतियां प्रदान की। वाॅटर ब्लेसिंग सेरेमनी परमार्थ निकेतन की नवोदित परम्परा है जिसके माध्यम से विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया जाता है और साथ ही यह संदेश दिया जाता है कि जल ही जीवन है, जल है तो कल है अतः जल का संरक्षण नितांत आवश्यक है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने भारत के विभिन्न प्रांतों से आये सभी अतिथियों को भारतीय संस्कृति युक्त जीवन जीने तथा सभी विशिष्ट अतिथियों को पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक पौधा भेंट कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प कराया।
भारत को खुले में शौच से मुक्त करने तथा सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु परमार्थ निकेतन शिविर में टाॅयलेट कैफेटेरिया बनाया गया है। जो लोग शौचालय के विषय में बात तक नहीं करना चाहते वह टाॅयलेट सीट पर बैठकर चाय और काॅफी का सेवन करे। संस्कृति विद्वत कुम्भ के उद्घाटन सत्र में देश के मूर्धन्यों ने अपने विचार व्यक्त किये।

माननीय राज्यपाल श्री केशरीनाथ त्रिपाठी जी ने कहा कि कुम्भ का आयोजन अद्वितिय है। यहां पर ईश्वर की कृपा और प्रशासन की व्यवस्था से अद्भुत रूप से सम्पन्न हो रहा है। हम मन को विकृतियों से मुक्त करने हेतु कुम्भ में आते है। अमानवीय, सामाजिक मान्यताओं से विरूद्ध और विकृत विचारों को मन को मुक्त करना है कुम्भ के आयोजन का उद्देश्य है। हृदय को स्वच्छ कर, अध्यात्म का पाठ सीखकर ईश्वर से अपने को जोड़ने का प्रयास ही मन से विकृतियों को निकालना है। कष्ट सहकर हृदय में पाली हुयी पवित्र भावनाओं पर विजय पाना ही कुम्भ का मर्म है, कुम्भ हमें बहुत कुछ देता है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, संत, वही जो इस देश के संगम को जिंदा रखते है। सबके साथ और सबके विकास की बात, समग्र विकास और सम्पूर्ण विकास की बात, सतत विकास और सुरक्षित विकास की बात के मंत्र देने वाला यह भारत है, भारत तो भारत है। भारत किसी ताजमहल, लाल किला, चैपाटी, हिमालय और गंगा की वजह से भारत नहीं है बल्कि यह देश इसलिये महान है क्योंकि इसके पास हिमालय सी ऊँचाई रखने वाले; सागर सी गहराई रखने वाले और गंगा सी पवित्रता रखने वाली विभूतियों का संगम हमारे पास है इसलिये यह देश महान है।
मध्यप्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान जी ने सभी को नर्मदा जयंती की शुभकामनाएं देते कहा कि ’’कुम्भ की परम्परा हमारी संस्कृति की परम्परा है। कुम्भ स्नान का मेला नहीं बल्कि विचारों का मेला भी हैै। कुम्भ में पूरे विश्व से आये विद्वान वैश्विक समस्याओं पर चिंतन करते है; विचार करते है और उससे जो अमृत निकलता है वह पूरे देश और दुनिया को परोसना ही हमारी परम्परा है।

फिल्म निर्देशक श्री मधुर भंडारकर जी ने कहा कि भारत ही पूरे विश्व के लोग कुम्भ का इंतजार करते है और सभी सहभाग करना चाहते है यह एक अद्भुत मेला है। उन्होने प्रयागराज मेला प्रशासन द्वारा की गयी व्यवस्था एवं स्वच्छता के लिये धन्यवाद दिया। श्रीमती मालिनी अवस्थी जी, प्रयाग की पौराणिक धरा है। कुम्भ दान की परम्परा है। विश्व का सबसे बड़ा अनुशासित जमावड़ा है कुम्भ, जो आपको और कहीं देखने को नहीं मिलता। कुम्भ एक ऐसा आयोजन है जहां पर बिना बुलाये लोग स्वयं पहुंचते है। उन्होने कहा कुम्भ अर्थात कलश और कलश हमेशा देने का कार्य करता है, कलश सदैव परिपूर्ण रहता है, भरा रहता है चाहे वह जल से भरा हो या विचारों से भरा हो। यहां पर शस्त्र और शास्त्र दोनों का एक साथ ज्ञान होता है यही उद्देश्य था संस्कार भारती का कि संस्कृति कुम्भ का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम में वक्ता के रूप में श्री कमलेश पाण्डेय जी, सलीम आरिफ जी, शेफाली जी, लुब्ना जी और अन्य उपस्थित रहे।
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Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality.
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