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अयोध्या में राम मन्दिर था और आगे भी राम मन्दिर ही रहेगा – शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द

अयोध्या में राम मन्दिर था और आगे भी राम मन्दिर ही रहेगा – शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द

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अयोध्या में राम मन्दिर था और आगे भी राम मन्दिर ही रहेगा – शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द

अयोध्या में राम मन्दिर था और आगे भी राम मन्दिर ही रहेगा – शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द


वाराणसी, 25 नवम्बर। अयोध्या में राम मन्दिर था और आगे भी वहाॅ राम मन्दिर ही रहेगा, उक्त उद्गार परम् आराध्य परम् धर्माधीश ज्योतिष एवं शारदा द्वारिका पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने काशी में आयोजित परम धर्म संसद के प्रथम दिन आयोजित संत सम्मेलन में व्यक्त किये। स्वामी स्वरूपानन्द जी महाराज ने कहा कि मन्दिर के अभी तक नही बन पाने की सबसे बड़ी वजह राजनीतिक खींचतान है। उन्होंने कहा कि जब सरकार संविधान की शपथ लेती है तो वह धर्म निरपेक्ष हो जाती है, वह किसी धर्म विशेष का पक्ष नही ले सकती। राम मन्दिर सनातन धर्म से जुड़ा विषय है, इसलिए धर्म निरपेक्ष सरकार से राममन्दिर के लिए कुछ उम्मीद नही किया जा सकता। मन्दिर के नाम पर सिर्फ सनातनी जनता को बेवकूफ बनाने की प्रक्रिया चल रही है। मन्दिर का निर्माण सिर्फ हम और संत महात्मा ही कर सकते है। विकास के नाम पर काशी में मन्दिरों में हो रही तोड़फोड़ उचित नही है। भारत पूरी दूनिया में आज भी शीर्षस्थ है क्योंकि भारत की सभ्यता और संस्कृति सबसे प्राचीन है। भारत के धर्मशास्त्रों का लाभ पूरा विश्व लेता है, इसकी सबसे बड़ी वजह वेदों की परम्परा का अनुकरण।


स्वामी स्वरूपानन्द जी महाराज ने गंगा सफाई पर जोर देते हुए कहा कि जीवनदायिनी गंगा आज आचमन योग्य भी नही रह गयी है जो चिन्ता का विषय है। गंगा पहले भी पवित्र थी और आज भी बस आवश्यकता है उसे अविरल करने की। उन्होंने कहा कि आज देश दुनिया में गौमांस के निर्यातक के रूप में ख्याति प्राप्त कर रहा है, जो सनातन धर्म के लिए उचित नही है। उन्होंने कहा कि सरकार आज मठ मन्दिरों पर नियंत्रण करने की तैयारी में लगी है, जिसमें वह मन्दिरों का हिसाब किताब रखना शुरू कर रही है सन्तों से हिसाब भ्रष्ट नेता व अधिकारी लेंगे इससे दुर्भाग्यपूर्ण विषय क्या हो सकता है

भजन से गूंजा परम धर्म संसद प्रांगण – परम धर्म संसद प्रांगण में प्रथम दिन सायंकाल काशी के कलाकारो ने भजनो की बयार बहाई। गायक डाॅ. विजय कपूर ने ‘यह धर्म संसद है, यह धर्म संसद है‘, ‘शंकर तेरी जटा से बहती है गंगधार‘ जैसे भजनो की सुमधुर प्रस्तुति दी। उनके साथ सह गायन पर खुशबू रोहित रही। तबले पर सुमन्त चैधरी, साइड रिद्म पर संजय श्रीवास्तव एवं बेंजो पर लक्ष्मण ने संगत की।

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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November 26, 2018 2 min read
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