मलबे में मिली मूर्तियों के मामले की न्यायिक जांच हो – मन्दिर बचाओ आन्दोलनम्

विगत उन्नीस दिसम्बर को धर्म नगरी वाराणसी के रोहित पुर क्षेत्र से मलबे में मिली 150 से भी अधिक मूर्तियों का मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को चोट पहुंचाने वाला है ।
आज भी मलबे को उलटने पलटने से पन्द्रह से बीस के बीच मूर्तियाँ निकली हैं जिन्हें लंका थाने में कल से रखी मूर्तियों के साथ आज ले जाकर रखा गया है। अभी भी मलबे में अनेक मूर्तियों के दबे होने की आशंका है ।

परन्तु जिस तरह से वाराणसी जिला और काशी विश्वनाथ मन्दिर प्रशासन कल से ही मामले की लीपापोती में लग गया है उससे आम जनमानस में यह आशंका उभरने लगी है कि करोड़ों लोगों की भावनाओं से खेलने का कार्य करने वाला कहीं बच न जाये। इसलिए हम काशी के अधोहस्ताक्षरकर्ता प्रबुद्धजन मन्दिर बचाओ आन्दोलनम् की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार से हाईकोर्ट के किसी न्यायाधीश की अध्यक्षता में मामले की न्यायिक जांच कराये जाने की मांग करते हैं ।

खण्डित शिवलिंग भी काशी में पूजनीय
कुछ लोगों ने कल मलबे में मिली मूर्तियों की हमारे द्वारा की गई पूजा और पूजा के लिए मूर्तियों की कस्टडी मांगने को शास्त्र विरुद्ध बताने की कोशिश कर रहे हैं जो उनके शास्त्र और परम्परा के अज्ञान अथवा पूर्वाग्रह का ही द्योतक है ।
क्योंकि स्कन्द पुराण का काशी खण्ड स्पष्ट कहता है कि दुरवस्था में पड़े और समय के फेर से टूट फूट गये शिवलिंग भी सर्वथा पूजनीय हैं ।
अदृश्यान्यपि दृश्यानि दुरवस्थान्यपि प्रिये ।
भग्नान्यपि च कालेन
तानि पूज्यानि सुन्दरि ।।काशीखण्ड 73/24-25
विश्वनाथ के प्रतिनिधि हैं काशी के बाकी शिवलिंग
काशी खण्ड 64/62 के अनुसार काशी के सभी शिवलिंग विश्वनाथ जी के प्रतिनिधि के रूप में स्थापित हैं । ताकि एक ही स्थान पर सारे भक्त एकत्र हो अव्यवस्था न उत्पन्न करें ।
तव प्रतिनिधीकृत्या-
स्माभिस्त्वद्भक्तिभावितैः।
प्रतिष्ठतेषु लिंगेषु
सान्निध्यं भवतोस्त्विह।।
काशी के शिवलिंग विश्वनाथ जी के शरीर के अंग
काशीखण्ड 33/168-173 के अनुसार काशी के सभी शिवलिंग विश्वनाथ जी के शरीर के अंग हैं। ऊंकारेश्वर शिखा,त्रिलोचन आंखें, गोकर्णेश्वर और भारभूतेश्वर कान, विश्वेश्वर अविमुक्तेश्वर दाहिने हाथ, धर्मेश्वर तथा मणिकर्णिकेश्वर बायें हाथ, कालेश्वर और कपर्देश्वर चरण, ज्येष्ठेश्वर नितम्ब, मध्यमेश्वर नाभि, महादेव जटायें, चन्द्रेश्वर हृदय, वीरेश्वर आत्मा हैं ।
इनके अतिरिक्त सभी लिंग उनके शरीर के नाखून, रोयें और धातुएँ तथा आभूषण हैं। अतः काशी के एक लिंग को उखाडने का मतलब है कि शिवजी को पीड़ा देना ।
काशी के सुअर भी शिवलिंग को उसकी जगह से नहीं हटाना चाहिए, यह जानते थे
भूदारोपि न भूदारं
तथा कुर्याद्यथान्यतः।
सर्वा लिंगमयी काशी
यतस्तद्भीतियन्त्रितः।।
काशीखण्ड 3/36 के अनुसार
काशी के सुअर भी स्वभाव के विपरीत भूमि नहीं खोदते थे कि कहीं कोई शिवलिंग अपने स्थान से चलित न हो जाये । दुःख की बात है कि उसी काशी में आज मन्दिर तोड़े जा रहे और शिवलिंग मलबे में फेंके जा रहे ।


झूठ बोल रहे हैं कार्यपालक
कार्यपालक अधिकारी ने कल मलबे से मिली मूर्तियों के काशी विश्वनाथ कारीडोर के तोड़े मन्दिरों की होने की संभावना के हमारे द्वारा व्यक्त किये जाने के तत्काल बाद बिना किसी जांच के यह घोषित कर दिया कि यह मलबा विश्वनाथ कारीडोर का नहीं है जबकि मलबा खुद बोल रहा है। मलबे की मिट्टी,पत्थर,ईंट और टाइल्स का मिलान करने से सिद्ध होता है कि मलबा वहीं का है। कल जिस स्थान से मूर्तियां मिलीं उसी मलबे के एक अंश की टाइल्स जो कि मूर्तियों के साथ लंका थाने में उपस्थित है का मिलान रात को बांसफाटक के पास पड़े मलबे के अंश से मैच कर रही है। और संयोग से उसी टाइल्स का अंश विश्वनाथ कारीडोर के अन्तर्गत गिराये जा रहे दुर्मुख विनायक की अवशिष्ट दीवार में आज भी लगे हैं ।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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