भूमिका
भारत पर्वों की भूमि है, जहाँ हर त्योहार के पीछे कोई न कोई आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कारण छिपा होता है। मकर संक्रांति ऐसा ही एक पावन पर्व है, जो न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है बल्कि प्रकृति और जीवन के बदलाव का भी प्रतीक है। यह त्योहार सूर्य देव की उपासना और सकारात्मक ऊर्जा के स्वागत का पर्व माना जाता है।
मकर संक्रांति क्या है?
मकर संक्रांति वह दिन है जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसे सूर्य के उत्तरायण होने का आरंभ भी कहा जाता है। इस दिन से सूर्य की गति उत्तर दिशा की ओर हो जाती है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना गया है। यही कारण है कि मकर संक्रांति को पुण्यकाल का पर्व कहा जाता है।
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व ( मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है )
हिंदू धर्म में सूर्य को जीवन का आधार और ऊर्जा का स्रोत माना गया है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा करने से रोग, कष्ट और नकारात्मकता दूर होती है। इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और जप-तप का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है, इसलिए तिल, गुड़, अन्न, वस्त्र और घी का दान शुभ माना जाता है।
मकर संक्रांति का ऐतिहासिक संदर्भ
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन ही भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि देव से मिलने जाते हैं, जो मकर राशि के स्वामी हैं। यह पर्व पिता-पुत्र के संबंधों में सामंजस्य और प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है।
महाभारत काल में भी इस पर्व का विशेष उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि भीष्म पितामह ने उत्तरायण का इंतजार कर इसी दिन देह त्याग की थी, क्योंकि इसे मोक्षदायी काल माना जाता है।
मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व
मकर संक्रांति केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इस समय सूर्य पृथ्वी के अधिक निकट होता है, जिससे वातावरण में गर्मी बढ़ने लगती है। शरीर को ऊर्जा और स्वास्थ्य लाभ मिलता है। यही कारण है कि इस पर्व पर तिल और गुड़ से बने पदार्थ खाए जाते हैं, जो शरीर को गर्मी और शक्ति प्रदान करते हैं।
मकर संक्रांति की प्रमुख परंपराएं
भारत के विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाई जाती है।
उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति कहा जाता है और गंगा स्नान का विशेष महत्व है।
पंजाब में यह पर्व लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है।
गुजरात और राजस्थान में उत्तरायण के नाम से पतंग उत्सव आयोजित होता है।
तमिलनाडु में यह पर्व पोंगल कहलाता है।
असम में माघ बिहू के रूप में इसका आयोजन होता है।
इन सभी परंपराओं का मूल उद्देश्य प्रकृति के प्रति आभार और जीवन में सकारात्मकता लाना है।
मकर संक्रांति और सामाजिक संदेश
मकर संक्रांति हमें एकता, दान और सद्भाव का संदेश देती है। तिल और गुड़ की मिठास यह सिखाती है कि जीवन में मधुर वाणी और प्रेम बनाए रखना चाहिए। यह पर्व यह भी बताता है कि जैसे सूर्य अपनी दिशा बदलकर नई शुरुआत करता है, वैसे ही हमें भी अपने जीवन में नकारात्मकता छोड़कर सकारात्मक मार्ग अपनाना चाहिए।
निष्कर्ष
मकर संक्रांति क्या है ? मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देने का अवसर है। यह पर्व धर्म, विज्ञान, परंपरा और सामाजिक मूल्यों का सुंदर संगम है। सूर्य देव की उपासना, दान-पुण्य और आपसी प्रेम के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व हमें उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है।
मकर संक्रांति क्या है? (FAQ)
~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो









