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करौंदी में श्रीमद्भागवत कथा: एक अविस्मरणीय अनुभव
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करौंदी में श्रीमद्भागवत कथा: एक अविस्मरणीय अनुभव
Hinduism
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Category: Hinduism
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करौंदी, महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ ( वैदिक विद्यालय ), प्रकृति की गोद में बसा एक वैदिक विद्यालय …..
भागवतकिंकर श्री अनुराग कृष्ण शास्त्री “श्री कन्हैयाजी”
प्रकृति की गोद में रहने का अनुभव कुछ ऐसा होता है, जैसे मानो जीवन निर्भार हो गया हो। खुले आकाश में उड़ते पंछी, वन्यजीव आदि जिस स्वतंत्रता के साथ घूमते हैं, उसका अनुभव बंधन में पड़ा जीव, भला क्या करेगा? जिस दिन यहाँ श्रीमद्भागवत कथा का प्रारम्भ हुआ, उस दिन शोभायात्रा से कुछ मिनट पहले की बारिश, मानो भागवत-भगवान् का स्वागत कर रही हो और फिर शोभायात्रा में विघ्न ना पड़े, उतनी देर के लिए वर्षा का थम जाना और पुन: भागवत प्रारम्भ होते ही तीव्र वर्षा, बहुत ही अच्छा अनुभव था। अगले दिन भी कथा के समय वही वर्षा का आनन्द. . . तब महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ (वैदिक विद्यालय) के प्रभारी श्री मुकेश सक्सेना जी ने कहा कि जब से कथा प्रारम्भ हुई है, कथा के समय लगातार बारिश हो रही है। बस, फिर क्या था अगले दिन से बारिश बन्द, मानो टोक लग गई हो। ख़ैर, कथा का प्रवाह नित्य की तरह ही प्रवाहित रहा। बहुत इच्छा थी कि इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आदरणीय श्री गिरीश ब्रह्मचारी जी भी इस कथा में पधारते, परन्तु; उनकी माँ का स्वास्थ्य अस्वस्थ होने के कारण, वे ना आ सके। श्रीराधामाधव युगल सरकार उनकी माँ के स्वास्थ्य को लाभ प्रदान करें, यही प्रार्थना है।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अगले दिवस, गोवर्धन पूजा की कथा के अगले दिन ही भरभरा आश्रम के एक ८५ वर्ष की अवस्था के संत श्री बनवारी दास महाराज जी का कथा में आगमन और उसी दिन पुन: बिजली कड़कते हुए मूसलाधार वर्षा। आ. .हा. . अद्भुत नज़ारा था वह। फिर इस विश्व विद्यालय के कुलपति श्रीभुवनेश शर्मा जी व उपकुलपति श्री बी. के. शुक्ला जी, श्रीरुक्मणी-मंगल की कथा के दिन पधारे। उनके साथ व्यक्तिगत बैठकर के सनातन वैदिक संस्कृति व संस्कारों के संरक्षण तथा संवर्धन पर चर्चा भी हुई। अब कल कथा का विश्राम हुआ, आज हवन-पूर्णाहुति और पूर्णाहुति के तुंरत बाद फिर से वर्षा। कहते हैं कि यज्ञ के बाद वर्षा मंगलसूचक है- “यज्ञाद् भवति पर्जन्य” और यहाँ तो प्रकृति की गोद में श्रीमद्भागवत महापुराण रूपी मंदाकिनी का निर्मल प्रवाह तथा उसमें अवगाहन करते विद्यालय के आचार्यगण एवं हज़ारों की संख्या में विप्र छात्रगण तथा साथ में गगन से बरसती वर्षा का आनन्द, मानो त्रिवेणी-स्नान का अनुभव करा रहे हों। प्रकृति की गोद करौंदी में प्रवाहित श्रीमद्भागवत कथा मंदाकिनी का यह अनुभव अविस्मरणीय रहेगा।
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