प्राचीनकाल में पंचवटी में होती थी कथायें अब केवल कथाओं में है पंचवटी – स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी
ऋषिकेश, 5 जून; परमार्थ निकेतन में ’माँ गंगा के तट ’ पर पर्यावरण संरक्षण एवं पतित पावनी माँ गंगा को समर्पित ’श्री राम कथा’ में योगशक्तिपीठ से श्री रसायनी बाबा जी, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री श्री थावर चन्द्र गहलोत, उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री श्री रमेश पोखरियाल निशंक और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने सहभाग किया।

आज श्री मानस कथा में महर्षि दयानन्द सरस्वती विकलांग आश्रम एवं सुगन्ध संस्थान नजीबाबाद के लगभग 30 दिव्यांग छात्रों ने सहभाग किया। इन दिव्यांग छात्रों ने मंत्रमुग्ध करने वाला संगीत प्रस्तुत किया। कथा श्रवण करने आये दिव्यांग छात्र संजय ने कथा के मंच से स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज द्वारा प्रसारित पर्यावरण संरक्षण का संदेश सुनकर स्वतः ही कहा कि आज मेरा जन्मदिवस है और मैं इस जन्म दिवस पर ’’केक पार्टी नहीं बल्कि पेड़ पार्टी’’ करूँगा। मैं अपने जन्मदिवस पर 100 पौधों का वितरण एवं रोपण का संकल्प करता हूँ। स्वामी जी महाराज ने कहा कि इस प्रकार के संकल्प का्रंतिकारी लोग लेते है जिसका परिणाम भी प्रभावकारी प्राप्त होते है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा, ’’प्रकृति को दिव्यांग नहीं बल्कि दिव्य बनाये। पर्यावरण संरक्षण के लिये पर्वों को पर्यावरण से जोड़ना ही बेहतर समाधान है। पर्व और कथा के अवसर पर ’पेडे नहीं पेड़ बाटे’। पर्व और उत्सव के अवसर पर, जन्मदिन और विवाह दिवस के अवसर पर उपहार के रूप में पेड़ बांटने और पेड़ लगाने की परम्परा को अपनाना पर्यावरण संरक्षण का बेहतर विकल्प है और प्रकृति की शरण में जाना ही बेहतर समाधान है। स्वामी जी महाराज ने कहा कि पहले तो पंचवटी में बैठकर कथायें होती थी और अब कथाओं में पंचवटी का वर्णन होता है। अब समय आ गया कि हम पुनः अपने गांवो और शहरों को पंचवटी जैसा स्वरूप प्रदान करे तथा हर खेत और आंगन को पंचवटी बनायें।’’

स्वामी जी महाराज ने कहा कि ’’दिव्यांगता, ईश्वर का अभिशाप नहीं वरदान है; इसे शारीरिक कमजोरी नहीं बल्कि अपना हथियार बनाये। उन्होने शरीरिक रूप से विकलांग ऋषि अष्टावक्र का उदाहरण देते हुये कहा कि उन्होने अपनी बुद्धि के बल पर विद्वानों को भी पीछे छोड़ दिया था आप सब ईश्वर की विशेष अनुकम्पा है उस पर गौर करे और आगे बढ़े।’’
श्री रसायनी बाबा जी ने कहा कि ’’कथा के श्रवण से ज्ञान, भक्ति और कर्म के साथ पुरूषोत्तम बनने का मार्ग प्रशस्त होता है। परमार्थ निकेतन के तट पर आयोजित दिव्य श्री राम कथा पर्यावरण को संरक्षित कर पृथ्वी को प्रदूषण मुक्त करने का संदेश देती है इसे आत्मसात कर हरियाली और खुशहाली युक्त वातावरण के निर्माण में योगदान प्रदान करे।’’
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री श्री थावर चन्द्र गहलोत जी ने कहा ’’श्री राम कथा शौर्य, रक्षा और मानवता की का संदेश प्रसारित करने वाली दिव्य गाथा है। भारत की संस्कृति पुरातन संस्कृति है; आदि सनातन संस्कृति है; दैवीय संस्कृति है। हम सभी अपने अन्दर दैवीय गुणों को विकसित कर भारत को और भी दिव्यता भर दे।’’
श्री रमेश पोखरियाल निशंक जी जी ने कहा ’’मानस की कथा मार्मिक कथा है; क्रान्तिकारी कथा है; वैदिक संस्कृति के संदेश की मौलिक व्याख्या है। मानस कथा हमें जीवन की शैली सीखाती है; गृहस्थ जीवन का मर्म बताती है परन्तु परमार्थ गंगा तट पर आयोजित कथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है। कथा को केवल सुन कर न रह जाये बल्कि यहां से पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर जायें।’’

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने श्री राम कथा में सहभाग करने वाले विशिष्ट अतिथियों को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया। भारत के केन्द्रीय मंत्री श्री गहलोत जी एवं पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड श्री रमेश पोखरियाल निशंक जी, हरिद्वार, ज्वालापुर के विधायक श्री राठौर, महर्षि दयानन्द सरस्वती विकलांग आश्रम से आये दिव्यांग बच्चे, पेरू, कोलम्बिया, इक्वाडोर, चिली आदि देशों से आयी कन्याओं ने गंगा, यमुना और पेड़-पौधों का रूप धारण कर माँ गंगा के तट पर स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु ’वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी’ सम्पन्न की । विश्व पर्यावरण दिवस के पूर्व संध्या पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कथा में उपस्थित सभी श्रद्वालुओं को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प कराया।
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