हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि माता सावित्री ने अपने तप, प्रेम और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत पतिव्रता धर्म और अटूट वैवाहिक प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
वर्ष 2026 में वट सावित्री व्रत को लेकर महिलाओं के बीच विशेष उत्साह देखा जा रहा है। आइए जानते हैं वट सावित्री व्रत 2026 की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसका धार्मिक महत्व।
📅 वट सावित्री व्रत 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। वर्ष 2026 में यह पवित्र व्रत 16 मई 2026, शनिवार के दिन रखा जाएगा। इस बार खास बात यह है कि उसी दिन शनि जयंती भी पड़ रही है, जिससे इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
⏰ वट सावित्री व्रत 2026 शुभ मुहूर्त
धार्मिक पंचांग के अनुसार इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं।
- ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:07 बजे से 04:48 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:04 बजे से 03:28 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:04 बजे से 07:25 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात्रि 11:57 बजे से 12:38 बजे तक
🌳 क्यों की जाती है बरगद के पेड़ की पूजा?
वट सावित्री व्रत में वट यानी बरगद के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार बरगद का पेड़ लंबी आयु, स्थिरता और अमरता का प्रतीक माना जाता है।
कहा जाता है कि इसी वट वृक्ष के नीचे सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लिए थे। इसलिए विवाहित महिलाएं इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा कर उसके चारों ओर धागा बांधती हैं और अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।
🪔 वट सावित्री व्रत पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- व्रत का संकल्प लें और पूजा की थाली तैयार करें।
- बरगद के पेड़ के नीचे जल अर्पित करें।
- रोली, अक्षत, फूल, धूप और दीप से पूजा करें।
- पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत या कलावा लपेटते हुए परिक्रमा करें।
- सावित्री-सत्यवान की कथा सुनें या पढ़ें।
- अंत में पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करें।
🛍️ पूजा सामग्री में क्या-क्या चाहिए?
वट सावित्री व्रत की पूजा में इन चीजों का विशेष महत्व माना जाता है:
- कच्चा सूत या कलावा
- रोली, अक्षत और सिंदूर
- फूल और माला
- धूप, दीप और कपूर
- फल और मिठाई
- भीगा हुआ चना
- पंचामृत
- नारियल
- तांबे का लोटा
- गंगाजल
- बरगद की डाल या वट वृक्ष
📖 सावित्री और सत्यवान की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार राजकुमारी सावित्री ने सत्यवान नामक राजकुमार से विवाह किया था। ऋषियों ने पहले ही बता दिया था कि सत्यवान की आयु बहुत कम है।
लेकिन जब सत्यवान की मृत्यु का समय आया, तब सावित्री ने अपने तप, बुद्धि और अटूट प्रेम से यमराज को प्रसन्न कर लिया। यमराज ने अंततः सत्यवान के प्राण वापस लौटा दिए। तभी से वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष माना जाता है।
✨ वट सावित्री व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और सौभाग्य बढ़ाता है। कहा जाता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया वट सावित्री व्रत पति की आयु बढ़ाने और परिवार में सुख-शांति बनाए रखने में सहायक होता है।
यह पर्व भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति, समर्पण और अटूट प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है।
🙏 अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ…
वट सावित्री व्रत की शुभकामनाएं।








