RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

मां लक्ष्मी की पूजा के सबसे प्रभावशाली मंत्र – श्री सूक्तम

मां लक्ष्मी की पूजा के सबसे प्रभावशाली मंत्र – श्री सूक्तम

मां लक्ष्मी की पूजा के सबसे प्रभावशाली मंत्र – श्री सूक्तम
Visual Archive

मां लक्ष्मी की पूजा के सबसे प्रभावशाली मंत्र – श्री सूक्तम

श्री सूक्त की ऋचाओं से नियमित हवन करने से विभिन्न कष्ट दूर होकर ऐश्वर्य व भोग की प्राप्ति होती है। अलक्ष्मी की अकृपा प्राप्त होने से एक ओर जहाँ दुःख दरिद्रता, रोग, कर्ज से मुक्ति मिलती है, वहीं दूसरी ओर लक्ष्मी की कृपा से भोग की प्राप्ति होती है।

।। अथ श्रीसूक्तम..।।

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्‌।
चंद्रां हिरण्यमणीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्‌।
यस्यां हिरण्यं विंदेयं गामश्वं पुरुषानहम्‌॥

अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रमोदिनीम्‌।
श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम्‌॥

कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलंतीं तृप्तां तर्पयंतीम्‌।
पद्मे स्थितां पद्मवणा तामिहोपह्वये श्रियम्‌॥

चंद्रां प्रभासां यशसा ज्वलंतीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्‌।
तां पद्मिनीमीं शरणं प्रपद्ये अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥

आदित्यवर्णे तपसोऽधि जातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः।
तस्य फलानि तपसानुदन्तु या अंतरा याश्च बाह्या अलक्ष्मीः॥

उपैतु मां देवसखः कीतिश्च मणिना सह।
प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन्‌ कीर्तिमृद्धिं ददातु मे॥

क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्‌।
अभूतिमसमृद्धि च सर्वां निर्णुद से गृहात्‌॥

गंधद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम्‌।
ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम्‌।

मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि।
पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः॥

कर्दमेन प्रजा भूता मयि सम्भव कर्दम।
श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम्‌॥

आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे।
नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले॥

आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिंगलां पद्ममालिनीम्‌।
चंद्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥

आर्द्रां यः करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम्‌।
सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ।

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्‌ ।
यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान्‌
विंदेयं पुरुषानहम्‌ ॥

यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्‌ ।
सूक्तं पंचदशर्च च श्रीकामः सततं जपेत्‌ ॥

॥ इति श्री सूक्तम्‌ संपूर्णम्‌ ॥

RW

Editorial Review Note

Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

By Religion World October 27, 2019 2 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

जगन्नाथ रथ यात्रा का रहस्य: आखिर भगवान जगन्नाथ हर साल मंदिर छोड़कर बाहर क्यों आते हैं?

पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक मानी जाती है। हर वर्ष आषाढ़ मास में भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र…

Read now
Hinduism

अंबुबाची मेला 2026: जब मां कामाख्या को माना जाता है रजस्वला, जानिए इस अनोखी परंपरा का रहस्य

असम के गुवाहाटी स्थित कामाख्या देवी मंदिर में हर वर्ष आयोजित होने वाला अंबुबाची मेला भारत के सबसे अनोखे और रहस्यमय धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता…

Read now
Hinduism

जगन्नाथ रथ यात्रा में भगवान किस द्वार से निकलते हैं? जानिए सिंह द्वार और अश्व द्वार का रहस्य

भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान सिंह द्वार से बाहर आते हैं, अश्व द्वार से नहीं। पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के चार प्रमुख द्वारों में से सिंह…

Read now