मां स्कंदमाता : नवरात्रि की पंचम देवी
नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप की पूजा की जाती है। देवी स्कंदमाता की आराधना से बुद्धि, ज्ञान और विवेक की प्राप्ति होने की मान्यता है। उनकी कृपा से आर्थिक स्थिति में सुधार आता है और कार्यों में लाभ मिलता है। नवरात्रि के पांचवें दिन भूरा (ग्रे) रंग पहनना शुभ माना जाता है। इस दिन की पूजा से भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति होने का विश्वास है।
देवी का यह स्वरूप बुध ग्रह से संबंधित माना जाता है। इस बार पांचवें दिन सरस्वती माता की पूजा भी की जाएगी। स्कंदमाता की उपासना विशेष रूप से ज्ञान, विवेक और शुभ फल की प्राप्ति के लिए की जाती है।
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देवी का महत्व
देवी मां का पाँचवाँ रूप स्कंदमाता के नाम से प्रचलित है। भगवान कार्तिकेय का एक नाम स्कंद भी है, जो ज्ञानशक्ति और कर्मशक्ति का सूचक माना जाता है। यह स्वरूप उस दैवी शक्ति का प्रतीक है, जो ज्ञान को कर्म में बदलती है। इसी कारण पंचम देवी की उपासना को व्यवहारिक ज्ञान और सही कर्म से जोड़ा जाता है।
मां स्कंदमाता पूजा विधि और भोग
नवरात्रि के पांचवें दिन शारीरिक कष्टों के निवारण के लिए माता को केले का भोग लगाया जाता है। इसके बाद इस प्रसाद को दान करना शुभ माना जाता है। बुद्धि में वृद्धि के लिए भक्त मंत्रों के साथ छह इलायची भी अर्पित करते हैं।
कल्याणकारी मंत्र
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
स्कंद तत्व का आध्यात्मिक अर्थ
शिव तत्व आनंदमय, शांत और कर्म से परे का सूचक है। देवी तत्व आदिशक्ति के रूप में समस्त कर्मों के लिए उत्तरदायी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि देवी इच्छा शक्ति, ज्ञान शक्ति और क्रिया शक्ति का समागम हैं। जब शिव तत्व का मिलन इन त्रिशक्तियों से होता है, तब स्कंद तत्व का उदय होता है।
स्कंदमाता ज्ञान और क्रिया के स्रोत तथा आरंभ का प्रतीक हैं। इसे सही ज्ञान से प्रेरित कर्म भी कहा जा सकता है। जब जीवन में कठिन परिस्थिति आती है, तब केवल ज्ञान नहीं बल्कि व्यवहारिक और क्रियात्मक ज्ञान की आवश्यकता होती है। इसी भाव को यह स्वरूप प्रकट करता है।
नवरात्रि के पांचवें दिन की आराधना से साधक के जीवन में ज्ञान, विवेक, शुभ फल और आंतरिक शक्ति का संचार होता है। इसलिए देवी के इस रूप की पूजा को अत्यंत फलदायी माना गया है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मां स्कंदमाता की पूजा नवरात्रि के किस दिन की जाती है?
मां की पूजा नवरात्रि के पांचवें दिन की जाती है।
मां स्कंदमाता की पूजा से क्या फल मिलता है?
मां की पूजा से बुद्धि, ज्ञान, विवेक और शुभ फल की प्राप्ति होने की मान्यता है।
मां स्कंदमाता को कौन-सा भोग लगाया जाता है?
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाया जाता है।
मां स्कंदमाता का मंत्र क्या है?
मां स्कंदमाता का प्रमुख मंत्र है — ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥
लेख – पं. दयानंद शास्त्री, उज्जैन
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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