दुनिया में इबादत का महीना लेकर आया है एक अद्भुत संयोग. जून के इस महीने में वो बात हुई है जिसके बारे में बहुत कमलोगों को पता है. 34 साल बाद वो हुआ है जो 1983 में हुआ था. रमजान के इस महीने पर एक खास बात हुई है जिसके होने के पीछे की वजह क्या है, ये हम आपको बताएंगे. रिलीजन वर्ल्ड ने इस खास संयोग की खोज की है.
देश के हर इबादत पसंद के लिए ये खास मौका है जब वो रमजान के इस अवसर पर अपनी प्रार्थनाएं अल्लाह को पेश कर सकता है. दरअसल इस वर्ष २८ मई से शुरू होने वाले रोज़े जून में जाकर ख़तम होंगे. बुजुर्गों की माने तो ऐसा 34 साल बाद होने जा रहा है. इससे पहले 1983 में लोगों ने जून में रोजे रखे गए थे. बुजुर्गों के मुताबिक इससे पहले 1949 में जून में रोजे पड़े थे. इस बार जून के अंतिम तीन रोजे सबसे लंबे 15 घंटा 36 मिनट के होंगे.
क्या है जून में रमजान पड़ने का कारण
जून में रोजे 34 साल बाद पड़े हैं इसलिए हम यह जानने को उत्सुक थे कि इसके पीछे की कोई खास वजह या कारण क्या है. मुस्लिम परिवार की एक रोजेदार युवती शहनाज़ खान ने बताया कि इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार मुहर्रम से नया साल शुरू होता है. इसके साथ ही इस्लामिक कैलेंडर के आधार पर हर साल हम दस दिन पीछे हो जाते हैं. इस वजह से दिन कम होने लगते हैं और जाते हैं. यही कारण हैं हर साल महीनों में अंतर आ जाता है जिस वजह से रमजान के महीनों में बदलाव आत रहता है.
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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