एक ही समय पर जन्म होने पर भी सबका अलग भाग्य क्यों होता है ?

 In Astrology

एक ही समय पर जन्म होने पर भी सबका अलग भाग्य क्यों होता है ?

एक साथ जन्म होने पर भी किस्मत अलग क्यों होती हैं ?

अक्सर एक प्रश्न ज्योतिष जगत में उठाया जाता है की एक ही समय एक ही स्थान पर एक ही घर में यहाँ तक की एक ही गर्भ अर्थात एक ही माता पिता की जुडवा संतानों के भाग्य अलग क्यों और कैसे हो जाते हैं। ज्योतिष जगत इसका उत्तर देश -काल -परिस्थिति के रूप में देता है, अर्थात देश -काल और परिस्थिति अलग होने से भाग्य अलग हो जाता है, किन्तु यह तर्क वहां बेमानी हो जाता है जब एक ही गर्भ से एक ही समय दो बच्चे पैदा हों और उनके भाग्य अलग हों। फिर यहाँ तर्क दिया जाता है की सेकण्ड अता मिनट के अंतर से भाग्य बदल जाता है। अगर लग्न और राशि, नवांश आदि सामान हों तो क्या केवल किन्ही एक दो वर्गों में थोडा अंतर आ जाने से पूरा भाग्य बदल जाएगा। तर्क पूरी तरह गले नहीं उतरता, चूंकि हम ज्योतिषी नहीं हैं (यद्यपि ज्योतिष की मूल भूत जानकारी है) यह प्रश्न हममे उत्कंठा जगाता है तो हम इसका उत्तर जानने का प्रयास अपने तंत्र ज्ञान के आधार पर करते हैं ,अब पढने वाले पाठक निर्णय करेंगे की हम कितना सही हैं। जरुरी नहीं की हम पूरी तरह सही ही हों।

इस प्रश्न का एक उत्तर ज्योतिष में ही मौजूद है जो कुछ हद तक सही है। ज्योतिष कहता है व्यक्ति के संचित कर्म उसका भाग्य बनाते हैं ,यह संचित कर्म हर व्यक्ति के अलग होते हैं अतः व्यक्ति का भाग्य अलग होता है। यहाँ इसे काटने वाला तर्क उत्पन्न होता है की संचित कर्मों के ही आधार पर तो ग्रह स्थितियां जन्म की बनती हैं और उन स्थितियों में जन्म लेने वाले वाले का भाग्य निर्धारित होता है, फिर संचित कर्म अलग से कैसे प्रभावित करते हैं। इसका उत्तर ज्योतिष के पास कठिन होता है। अलग अलग तर्क प्रस्तुत किये जाने लगते हैं। किन्तु इसका उत्तर तंत्र के पास है। संचित कर्म अगले जन्म के भाग्य में भारी परिवर्तन लाते हैं भले ग्रह स्थितियां समान हों, जन्म समय समान हों कई लोगों के, परिस्थितियां और परिवार समान हों।

जब भी ज्योतिष की बात होती है, तो एक बात हमेशा उठकर आती है, जो बहुत ही रोचक है, कि एक ही समय पर कई बच्चों का जन्म होता है, तो सब की कुंडली एक जैसी बनेगी। परंतु सब का भाग्य अलग-अलग होता है। ऐसा क्यों?

ज्योतिष में कुंडली देखकर ही मनुष्य का भाग्य बताया जाता है ।इस बात को मैं आज कल के संदर्भ में ही समझाना चाहूंगा । जिस प्रकार आप देखते हैं की WIFI अपने इंटरनेट की सर्विस कई मोबाइलों को एक साथ दे रहा होता है ।परंतु सभी मोबाइल अलग अलग तरीके से उसको प्रयोग करते हैं। या यह कहो, कि सब मोबाइलों की क्षमता अलग-अलग होती है। यह इस बात पर निर्भर करता है की मोबाइल किस कंपनी का है और किस क्वालिटी का है।

ध्यान रखें,अगर मोबाइल एप्पल का होगा तो बिल्कुल अलग होगा ।अगर Android होगा तो बिल्कुल अलग होगा ।अलग-अलग कंपनियों के मोबाइल अलग-अलग तरीके की सुविधाएं देते हैं । Nokia का अलग है , Samsung का अलग है, Sony का अलग है बहुत सारी कंपनियां है ।और एक ही कंपनी में भी बहुत सारे मॉडल्स हैं ।इससे हमने यह जाना है कि वाईफाई को प्रयोग करना मोबाइल की अपनी क्षमताओं में, और क्वालिटी में निर्भर करता है ।अब इसे मैं कुंडली से और हम से जोड़ देता हूँ ।वाईफाई को हम लेंगे किसी निश्चित समय पर ग्रहों की स्थिति ।और जन्म लेने वाले बच्चे मोबाइल है ।वह किस कंपनी के हैं ?किस क्वालिटी के हैं ? किस कीमत के हैं ?इस पर ही निर्भर करेगा कि वह वाईफाई की सुविधा का किस प्रकार से लाभ ले सकते हैं ।

इसे हम ज्योतिष की भाषा में कहेंगे देश काल पात्र के अनुसार। ज्योतिष के अनुसार किसी भी व्यक्ति को भाग्य उसके देश काल पात्र के अनुसार मिलता है ।उसने किस देश में जन्म लिया है ,किस घर में जन्म लिया है ,और किस पात्र के रुप में जन्म लिया है इस पर ही निर्भर करता है कि उसे कैसा जीवन मिलेगा। वह अपने जीवन में भोगों को कितना भोग पाएगा ।जिसके पास जैसा मोबाइल ,जैसा इंस्ट्रूमेंट ,वही है उसका देश काल पात्र ।उसी के अनुसार वह सुविधाएं ले पाएगा। सभी की कुंडलियां एक ही तरीके से नहीं देखी जा सकती ।पहले हमें उसका देश काल पात्र जाना पड़ता है ।और उसी के हिसाब से ही उसके भाग्य को बताया जाता है ।क्योंकि उसकी क्वालिटी के हिसाब से ही उसको सर्विसेस मिलती हैं ।अब आप समझ रहे हैं ना ,कितना आसान हो गया इस बात को समझना जिसको आप बहुत मुश्किल समझ रहे थे ।और आप सब लोग यह जानते ही हैं कि भाग्य हमें ,हमारे पिछले जन्मों के कर्मों के फल स्वरुप ही मिलता है ।तो आप ही बताइए कोई भी दो व्यक्ति एक से कर्म कर सकते हैं ?जब दो व्यक्तियों की एक शक्ल नहीं होती ,तो आप इस बात की कैसे उम्मीद लगा सकते हैं ?

जब कर्म ही हमारे एक से नहीं है तो भाग्य कैसे एक सा होगा। हर मनुष्य अपने आप में अलग है। मोबाइल कंपनियां तो कुछ ही हैं और उनके मॉडल भी कुछ ही हैं ।लेकिन मनुष्य हर एक अलग है ।अलग कंपनी का और एक अलग मॉडल ।उसकी अपनी एक अलग शख्सियत है ।तो उसका भाग्य एक जैसा कैसे हो सकता है ।जब मोबाइल का इंस्ट्रूमेंट सबका अलग है तो वाईफाई की सर्विस से सब को एक से फ़ायदे कैसे मिल सकते हैं ?सबके पास एक से ऐप कैसे डाउनलोड हो सकते हैं ?आज सब लोग मोबाइल से अच्छी तरीके से परिचित हैं ।और उसकी ऐप्स से भी ।

जन्म लेने वाले हर व्यक्ति के पिछले जन्मों की अनुभूतियाँ अलग होती हैं ,उसकी यादें अलग होती हैं ,संघर्ष अलग होते हैं ,लग्न अलग होते हैं (भले इस जन्म में समान हों), जिनके आधार पर उनकी अवधारणा और व्यक्तित्व अलग होता है। उन व्यक्तित्वों के अनुसार उनके अवचेतन की संगृहीत यादें अलग होती हैं। अवचेतन की कार्यप्रणाली अलग होती हैं। जैसा की हिन्दू मतावलंबी जानते हैं आत्मा अमर है कभी नहीं मरती ,शरीर बदलती है यह आत्मा। तो इस आत्मा के शरीर से अलग हो जाने पर आत्मा की यादें पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती। अवचेतन की यादें आत्मा के साथ बनी रहती हैं। अगर आत्मा की यादें समाप्त हो जाती तो फिर पित्र नहीं होते ,न उन्हें अपने कुल की याद होती। भूत-प्रेत की यादें भी न होती और वह प्रतिक्रया अलग अलग नहीं कर रहे होते। गुरु और साधू महात्मा अपने अनुयाइयों और शिष्यों का मार्गदर्शन न कर रहे होते शरीर छूटने पर भी |कोई बच्चा अपने पूर्व जन्म की बातें न बता देता। इस तरह यह यादें व्यक्ति की आत्मा के साथ जुडी रहती हैं और जन्म के बाद अवचेतन में सुरक्षित रहती हैं। कभी कभी कोई स्वप्न दिखाती हैं किसी स्थान अथवा दृश्य की और कुछ दिन बाद व्यक्ति को आभास होता है की अरे यहाँ तो में सपने में पहले आ चूका हूँ।या अचानक लगता है अरे यहाँ तो पहले आया हूँ कभी ,भले स्वप्न नहीं आया था। यह पूर्व जन्म की यादें होती हैं जो अवचेतन में सुरक्षित होती हैं।

जब व्यक्ति जन्म लेता है तो भले उसकी लग्न और ग्रह स्थितियां समान हों किन्तु अवचेतन की यादें और सोच अलग होती हैं |इसके कारण उसके निर्णय ,सोचने की दिशा ,उसका व्यक्तित्व ,उसकी अनुभूतियाँ दुसरे समान लग्न और समय में जन्मे बच्चे से अलग होती हैं |इनके आधार पर उसके निर्णय ,क्षमता प्रभावित होते हैं फलतः उसका विकास अलग हो जाता है जिससे उसका भाग्य अलग होने लगता है |समान अवसर पर भी कोई अधिक विकास कर जाता है कोई कम क्योकि उसके अवचेतन में भिन्न ज्ञान हैं | सबके गुण ,रुचियाँ भी धीरे धीरे बदल जाती हैं ,कार्यशैली बदल जाती है | अपनी अनुभूतियों के अनुसार कोई साहसी होता है और रिस्क लेने में नहीं हिचकता क्योकि उसे उसका परिणाम और हल पता है अनजाने में ही सही वह साहस भरे निर्णय लेता है जबकि दूसरा असमंजस में होता है अथवा भययुक्त होता है ,क्योकि पिछले जन्मो में उसकी यादों में ऐसा कुछ नहीं ,उसका अवचेतन रिस्क लेने की गवाही नहीं देता उसे परिणाम नहीं पता।

यह विश्लेषण सामान्य ज्योतिषी ,यहाँ तक की सामान्य तांत्रिक और वैदिक की भी समझ में नहीं आएगा किन्तु एक मनोवैज्ञानिक और जानकार तांत्रिक इसे समझ जाएगा |ऐसा ही होता है |यहाँ संचित कर्म कार्य करता है ,भले वह दिखाई नहीं देता |यद्यपि आलोचक इसके प्रमाण मांग सकते हैं किन्तु फिर भी ज्योतिषी इस तर्क को समझ कर उपरोक्त प्रश्न का उत्तर दे सकता है |यह विश्लेषण तो समान गर्भ से समान समय में जन्मे व्यक्तियों के लिए था |अब देखते हैं समान समय अलग परिवारों में जन्मे व्यक्तियों के भाग्य कैसे होंगे |

एक ही समान जन्म समय पर समान परिस्थिति में किन्तु अलग परिवारों में जन्मे व्यक्तियों का भाग्य निश्चित रूप से अलग होगा |क्योकि यहाँ कई फैक्टर कार्य करते हैं जो भाग्य निश्चित रूप से बदल देते हैं |ऐसे लोगों में उपरोक्त अवचेतन की अनुभूतियाँ और यादें तो अलग होती ही हैं ,घर परिवार ,माता-पिता पर कार्य कर रही शक्तियां और उर्जायें भी अलग होती हैं जो जन्म लेने वाले बच्चे के आनुवंशिक गुणों के साथ ही जन्म के बाद उसके विकास को भी प्रभावित करती हैं |माता-पिता ,दादा-दादी ,परिवारीजनों के कर्मानुसार सकारात्मक अथवा नकारात्मक उर्जायें अथवा शक्तियाँ उनसे जुडी होती हैं |घर पर अलग उर्जाओं का प्रभाव हो सकता है ,कुलदेवता-देवी की अलग प्रकृति हो सकती है ,पितरों की अलग स्थिति और प्रभाव हो सकता है ,अलग ईष्टों के अनुसार अलग प्रभाव हो सकता है |यह सब मिलकर हर उस बच्चे पर अलग प्रभाव डालते हैं जो उसके विकास ,सोच ,अनुभव को प्रभावित कर देते हैं फलतः भिन्न वातावरण में विकास होता है और प्रतिक्रिया भिन्न हो जाती है जिससे उन्नति और भाग्य बदल जाते हैं |यहाँ तो लाखों वर्षों के संचित आनुवंशिक गुण अथवा उत्परिर्वन भी प्रभावी होते हैं फलतः बच्चा दुसरे समान समय के बच्चे से पूरी तरह अलग होता है और उसका भाग्य भी अलग होता है |

जब एक गर्भ के समान समय के बच्चों और अलग परिवारों के समान परिस्थिति और समय के बच्चों में इतना अंतर आ जाता है तो अलग परिस्थिति और पारिवारिक स्तर के बच्चों में कितना अंतर आएगा यह आप समझ सकते हैं |इसीलिए कोई बच्चा गरीब परिवार में जन्म लेकर राजा बन जाता है जबकि समान समय में जन्मा राजा के घर का बच्चा राज्य गवां देता है |कोई कोई मुंह में चंडी का चम्मच लेकर पैदा होता है तो कोई भुखमरी में इसका विश्लेषण हम कभी दुसरे पोस्ट में करेंगे |हमारा विचार है भाग्य का अंतर क्यों होता है यह सामान्य जन को समझ आ गया होगा |इसे इस तरह से समझा जा सकता है |विज्ञान के अनुसार किसी बच्चे का 90% मानसिक विकास ५ वर्ष की उम्र तक हो जाता है |यदि उसे बेहद अनुकूल वातावरण ,सकारात्मक ऊर्जा ,ऊत्तम सोच का मार्गदर्शन मिले तो उसका 90% बेहतरीन विकास समय से हो जाता है ,पर यदि नकारात्मक उर्जाओं का प्रभाव घर-परिवार में हो ,बेहतर वातावरण न हो ,सही मार्गदर्शन न मिले जिसके बहुत से कारण हो सकते हैं तो उसी समान समय में जन्मे बच्चे का समय से विकास नहीं हो पायेगा ,फलतः जीवन भर यह समय उसे प्रभावित करेगा |

हमारा ज्योतिष बहुत ही वैज्ञानिक है ,प्रैक्टिकल है ,लॉजिकल है ।यह अंधविश्वास की बात नहीं करता ,तर्क की बात करता है ।आप बताइए जो मैंने आपको तर्क दिया क्या वह सही नहीं है ।अगर वह सही है तो फिर दो लोगों का भाग्य कभी भी एक सा नहीं हो सकता ।आप लोग मुझसे जुड़े रहेंगे ,तो मैं आपको ज्योतिष की बहुत सारी बातें समझाऊंगा ।और आपके मन में जितने भी ज्योतिष से जुड़े हुए सवाल हैं सभी के धीरे धीरे जवाब देने की कोशिश करूंगी ।बहुत गहरा है ज्योतिष ।आप उसे समझे ।उसकी वैज्ञानिकता को समझे ।ज्योतिषियों को समझें और अपने देश की धरोहर ज्योतिष का सम्मान करें ।और ज्योतिषियों का भी सम्मान करें ।क्योंकि यह ही आपके देश की धरोहर को संभाल कर रख रहे हैं ।

एस्ट्रोलॉजी इस पर अपनी स्पष्ट राय रखती है तथा इस मुद्दे पर उसके सामने कोई भ्रम की स्थिति नहीं है। वस्तुतः ऐसी स्थिति की कल्पना कीजिए जबकि एक ही हॉस्पिटल में किसी प्रसूता ने एक ही वक्त पर दो बच्चों को जन्म दिया हो।

उनकी परवरिश भी समान पर्यावरण व परिस्थितियों में होती है। किंतु आगे चलकर उनमें से एक तो बड़ा राजनेता बनता है और दूसरा एक अपराधी तथा समाज के लिए खतरनाक इंसान। सामान्य एस्ट्रोलॉजी का ज्ञान रखने वाले तो यही कहेंगे कि ऐसी स्थिति में लग्न चक्र सहित सभी ग्रह-नक्षत्र पूर्णतया एक ही होंगे तो फिर उनके जीवन का फलादेश भी एक ही होगा। किंतु वास्तविकता में ऐसा होता नहीं तो फिर या तो ज्योतिष शास्त्र ही गलत मान्यताओं पर आधारित है अथवा कोई न कोई दूसरी थ्योरी यहां काम करती होगी।

आइए समझते हैं हकीकत क्या है और ऐसा क्यों होता है कि एक ही वक्त और स्थान पर जन्में इंसानों की किस्मत अलग-अलग होती है?

जिस प्रकार पानी में एक पत्थर फेंकने पर लहरें उत्पन्न होती हैं तथा एक लहर के विलुप्त होने के साथ ही दूसरी लहर जन्म ले लेती है और यह क्रम ऊर्जा के क्षय होने तक जारी रहता है। ठीक उसी प्रकार कर्म फल का सिद्धांत भी कार्य करता है।

पूर्व जन्मों के संचित कर्मों के कारण आपकी किस्मत भी प्रभावित होती है। दो बच्चों ने एक ही मां के गर्भ से समान समय पर जन्म लिया तो यकीनन उस समय समस्त ग्रह और नक्षत्र समान होते हैं ऐसे में तो उनकी पूरी लाइफ एक ही ढर्रे पर चलनी चाहिए थी किंतु ज्यादातर स्थितियों में ऐसा ही नहीं है। यहां पर कर्म फल का प्रभाव जानने के लिए उन बच्चों के पूर्व जन्म की स्थिति जाननी होगी तभी हम निर्धारित कर पाएंगे कि उनका भावी जीवन कैसा रहेगा।

इसका ज्योतिषीय समाधान ये है कि उनके जन्म के पहले की कुण्डली बनाकर उस जन्म में उनके द्वारा किए गए कर्मों का संज्ञान लिया जाए। तदनुसार ग्रहों का बलाबल और नक्षत्रों के प्रभाव का आंकलन कर उनके भावी जीवन की रूपरेखा निर्धारित की जाए अन्यथा की स्थिति में कभी भी सटीक फलादेश कथन संभव नहीं होगा और ज्योतिष विज्ञान पर सवाल उठते ही रहेंगे।  

क्या कहता है इतिहास ?

इतिहास में काफी ऐसी घटनाएं दर्ज हैं, जो ज्योतिष की मौजूदगी को स्वीकारती हैं। जहांगीरनामा के मुताबिक अकबर के दरबार में ज्योतिक राय नामक ज्योतिषी थे, जो बाद में जहांगीर के दरबार में भी रहे। उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि राजकुमार जहांगीर नदी में गिर जाएगा लेकिन उसकी जान को खतरा नहीं है। 27 मार्च 1620 को ऐसा ही हुआ। उनकी बेगम की मृत्यु की भविष्यवाणी भी ज्योतिक राय ने दो महीने पहले ही कर दी थी। वुड्रो वॉट नामक अंग्रेज ने लंदन टाइम्स में लिखा कि मैं 1944 में बीकानेर में मैं के. पी. शर्मा ज्योतिषी से मिला। उन्होंने मेरे बारे में कई भविष्यवाणियां लिखकर दीं, जो सही साबित हुईं। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रीगन भी एक ज्योतिषी की सलाह लेते थे। जब इस पर रैशनलिस्ट लोगों ने उन्हें घेरा तो वॉट ने रीगन को सपोर्ट किया। 

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जीवनी में पुपुल जयकर ने लिखा है कि जवाहर लाल नेहरू जैसे अंग्रेजी मानसिकता के शख्स ने कमला नेहरू जैसी सरल महिला से शादी इसलिए की, क्योंकि उनकी कुंडली मिलाकर ज्योतिषी ने कहा था कि कमला की कोख से पैदा होनेवाली संतान बहुत यशस्वी होगी। सार्वजनिक तौर पर ज्योतिष को न माननेवाले नेहरू ने राजीव गांधी की भी कुंडली बनवाई थी। रूस के वैज्ञानिक चेजेविस्की ने अपनी स्टडी में नतीजा निकाला कि जब भी सूरज में फ्यूजन और फिशन होता है- हर 11-14 साल में- तब दुनिया में असंतोष फैलता है और क्रांति की ओर अग्रसर होता है। इस पर स्टालिन ने उन्हें जेल में डाल दिया।

ये हैं ज्योतिष से जुड़े कुछ मुख्य प्रश्न  

वर्तमान में ज्योतिष का वैज्ञानिक रूप लोप हो गया है और कम पढ़े-लिखे लोगों की वजह से ज्योतिष डराने का आधार बन गया है। असल में, ज्योतिष एक त्रिकोण का हिस्सा है, जिसमें योग और आयुर्वेद भी उतने ही अहम हैं। जिस तरह मेडिकल साइंस में स्पेशलाइजेशन होता है, उसी तरह ज्योतिष में भी स्पेशलाइजेशन होता है। हर ज्योतिषी हर विषय की सही जानकारी नहीं दे सकता। यह सांकेतिक विज्ञान है, भविष्य सूचक नहीं।पिछले कुछ बरसों से सही रिसर्च न होने से लोगों को इस पर उंगली उठाने का मौका मिल रहा है। आजकल बहुत-से ज्योतिषी होरा (इंसान के बारे में) और मेदिनी (संसार के बारे में, भूकंप, बारिश, देश आदि) विषयों को मिलाकर लोगों को डराने का काम कर रहे हैं। सबसे अच्छा तो यह है कि ज्योतिषी के पास जाने की बजाय पुरुषार्थ करें और ईश्वर का नाम लें। अच्छे कर्म खुद-ब-खुद फायदा पहुंचाते हैं। 

यह ऐसा विषय है, जो गणना के आधार पर समय रहते अच्छा मार्गदर्शन कर सकता है। जिस तरह सभी धंधों में सही और गलत लोग हैं, उसी तरह इसमें भी कुछ लोग अच्छे जानकार हैं तो कुछ ठग भी हैं, जो अंधविश्वास फैला रहे हैं, लेकिन आदमी गलत हो सकता है, ज्ञान नहीं। हालांकि यह अंतहीन विषय है और जिसके बारे में सही निकलता है, उसका विश्वास बन जाता है, बाकी इसे गलत करार देते हैं।

ज्योतिष कैसे काम करता है?

उत्तर –  किसी भी जातक की कुंडली 12 राशि, 9 ग्रह और 27 नक्षत्रों को लेकर बनाई जाती है। सही गणना के लिए तारीख, वक्त, स्थान तीनों सही होने चाहिए। ग्रहों के अलावा पिछले पूर्वजन्म भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जन्मकुंडली के अलावा हस्तरेखा, प्रश्नकुंडली आदि तरीकों से भी भाग्य पढ़ा/जाना जाता है। दूसरे शब्दों में कहा जाये तो बाहरी दुनिया के साथ हमारे संपर्कों को जानने-समझने का तरीका है ज्योतिष। यह ऐसा विज्ञान है, जो वातावरण द्वारा मनुष्य पर पड़नेवाले प्रभावों की स्टडी करता है। इसमें समुद्र तल से ऊंचाई, देशांतर-अक्षांश, पर्यावरण, स्तंभन, चुंबकत्व, गुरुत्वाकर्षण, रेडिएशन ईश्वर, पुनर्जन्म, पूर्वजन्म और मनुष्य का विवेक मायने रखता है। ज्योतिष महज संकेत करता है, उससे जानना और समझना हमारे ऊपर है। इसके लिए देश-पात्र-काल जरूरी है लेकिन कर्म और संगत का भी असर होता है। प्रश्नकर्ता को घरवालों के ग्रह भी प्रभावित करते हैं। साथ ही, आप कैसा सोचते हैं, क्या करते हैं, ये सब बातें भी प्रभावित करती हैं। 

क्या जन्म कुंडली में समय का कितनी कमी-बेशी चलती है?

वैदिक ज्योतिष अनुसार लगभग हर दो घंटे में लग्न बदलता है। कई बार एक मिनट के अंतर से भी लग्न बदल जाता है, मसलन अगर 2 बजे लग्न बदल रहा है और जन्म 1:59 मिनट पर हुआ तो दूसरा लग्न होगा। तब जन्म समय में 1 मिनट के फर्क से ही गणना में बहुत ज्यादा अंतर आ जाएगा। अगर लग्न नहीं बदला है तो थोड़ा अंतर हो सकता है। इसका प्रभाव दो तरह से होता है। एक राशि या लग्न बदल जाना और दूसरे ग्रह की ताकत बदल जाना। लेकिन वक्त काफी मायने रखता है। 3.40 सेकंड में नवांश (नवां हिस्सा) बदल जाता है और एक मिनट के फर्क से गणना में 20-25 फीसदी बदलाव आ जाता है। इस तरह मिनटों का अंतर भी गणना में फर्क ला देता है। सही गणना के लिए सही वक्त और जगह का होना जरूरी है। लेकिन यह भी सच है कि एक ही वक्त पर एक ही जगह जन्मे सभी बच्चों का भविष्य एक नहीं होगा। कर्मयोग और वातावरण से बदलाव आ सकता है। 

ज्योतिष द्वारा क्या बता सकते हैं, क्या नहीं? क्या जाना जा सकता हैं और क्या नहीं ?

ज्योतिष अथवा किसी जन्म कुंडली द्वारा करियर, रिश्ते, कामयाबी, एजुकेशन, बच्चों आदि के बारे में बता सकते हैं लेकिन अगर कोई यह पूछे कि आज मैंने क्या खाया था तो यह नहीं बताया जा सकता ? ज्योतिष में ECMCDIP का फॉर्म्युला चलता है, यानी एजुकेशन, करियर, मैरिज, चिल्ड्रन, डेथ, इलनेस और प्रॉपर्टी के बारे में जानने में लोगों की सबसे ज्यादातर दिलचस्पी होती है। लेकिन ज्योतिष महासागर है। बीते या आनेवाले वक्त की सभी बातें सटीक बताना मुमकिन नहीं हैं। प्रफेशन, बीमारी, देश-विदेश का योग, विवाह, बच्चे, रिश्ते सभी के बारे में बता सकते हैं लेकिन ये सिर्फ संभावनाएं होंगी। कर्म तो करना ही पड़ेगा। अगर कोई ये कहे कि इस बंजर जमीन पर फसल कब उगेगी तो बताना मुश्किल है।

ज्योतिष की सीमाएं क्या हैं? कहां ज्योतिष काम नहीं कर पाता या गलत साबित होता है?

ज्योतिष या ज्योतिषी केवल मात्रा एक कुशल मार्गदर्शक या संकेतक का काम कर सकता है । अगर ईश्वर न चाहे या किसी ने अपना आत्मबल काफी मजबूत किया हुआ है तो ग्रह चाल का असर काफी कम होगा। हठयोग के आगे ज्योतिष हार जाता है। अगर किसी को बताया जाए कि बुरा वक्त है और वह सावधान हो जाता है तो वक्त टल सकता है लेकिन तब वही व्यक्ति कहेगा कि ज्योतिषी का बताया गलत साबित हुआ। लोग अक्सर इंटरप्रेट भी गलत कर लते हैं। ज्योतिष बस दिशा दिखाता है। कर्म किए बिना फल की उम्मीद बेकार है।

ज्योतिष आधारित भविष्यवाणियों कितनी सफल होती हैं ? ( उनका का सक्सेस रेट क्या है?)

लगभग 80-85 फीसदी, यदि ज्योतिषी/गणितकर्ता अनुभवी हो |

क्या ज्योतिष द्वारा भाग्य बदला जा सकता हैं ?

अथवा अगर पहले से हमारी जिंदगी की स्क्रिप्ट लिखी है तो उपायों से वह किस हद तक बदली जा सकती है?

 सब कुछ लिखा है। हर बारीक से बारीक बात लिखी है। उपायों से थोड़ा-बहुत बदल सकते हैं। अगर हल्का मारक है यानी ग्रह की पावर कम है तो टाला जा सकता है, प्रबल मारक को रोका नहीं जा सकता। हस्त रेखाएं बनती-बिगड़ती हैं। भाग्य भी बदलता है। भाग्य को कर्म और दूसरे उपायों से 50 फीसदी तक बदलाव मुमकिन है। काफी बदलाव किया जा सकता है। हालांकि भाग्य का लिखा मिटता नहीं है सिर्फ कुछ हद तक फेरबदल किया जा सकता है। मसलन, एक बच्चे के ग्रह अच्छे हैं लेकिन बुरी संगति में पड़कर बिगड़ सकता है।

क्या ज्योतिष अनुसार रत्नों धारण का प्रभाव होता है?

बिल्कुल नहीं।

क्या हम सभी को पिछले जन्म के कर्म भुगतने ही होंगे?

जी हां | बिल्कुल भुगतने पड़ेंगे। लेकिन इस जन्म में अच्छे कर्मों से कुछ बदलाव कर सकते हैं। हमारे हाथ में सब कुछ नहीं है लेकिन अपनी कोशिशों से हम कुछ तो बदलाव कर ही सकते हैं। सबका नसीब अलग-अलग होता है, वरना एक जगह पैदा हुए सभी बच्चे एक जैसे हो जाएं। इस जन्म के कर्मों के आधार पर पिछले जन्म के कर्मों का प्रभाव कुछ कम हो सकता है।

सही ज्योतिषी की पहचान क्या है?

एक सही/सच्चा/अनुभवी ज्योतिषी वह हैं जो अपने विषय का जानकार हो, पढ़ा-लिखा हो और तार्किक तरीके से सोचे। तामझाम और आडंबर के चक्कर में नहीं आना चाहिए। उपाय भी ऐसे होने चाहिए, जो आप खुद कर सकें। अच्छे ज्योतिषी के पास तकनीकी, बौद्धिक और नैतिक उत्कृष्टता होती है। अच्छा ज्योतिषी सामने बिठाकर या चित्र देखकर फैमिली बैकग्राउंड जानकर बताएगा। किसी की गणनाएं कितनी सही निकलती हैं, इस आधार पर भी पता लगाया जा सकता है। वैसे, दूसरे क्षेत्रों की तरह ज्योतिषियों के लिए डिग्री जरूरी होनी चाहिए। बाजारू ज्योतिषी उपाय बताएगा और उपाय खुद करने के नाम पर पैसे एंठेगा। आपकी कुंडली देखकर जो आपके बारे में मोटी-मोटी बातें सही बता दे, उसे विषय का जानकार मान सकते हैं। 

राशिफल को कितना सही मानें?

राशिफल महज सांकेतिक हैं। ये सिर्फ मोटा-मोटा बता सकते हैं। वैसे भी 12 राशियां हैं और 600 करोड़ लोग हैं। ऐसे में एक राशि में आए 50 करोड़ लोग। तो भला इतने लोगों का भविष्य एक जैसा कैसे हो सकता है। दैनिक राशिफल बेकार होते हैं ।

===========

पंडित दयानन्द शास्त्री,

(ज्योतिष-वास्तु सलाहकार)

Recommended Posts
Contact Us

We're not around right now. But you can send us an email and we'll get back to you, asap.

Not readable? Change text. captcha txt

Start typing and press Enter to search